रांची: भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने झारखंड मुक्ति मोर्चा पर करारा हमला बोलते हुए कहा है कि अपनी छह वर्षों की विफलताओं को छिपाने के लिए हेमंत सरकार केंद्र सरकार पर निराधार आरोप लगा रही है। उन्होंने दावा किया कि आंकड़े साफ बताते हैं कि केंद्र ने झारखंड को भरपूर मदद दी है, लेकिन राज्य सरकार ने योजनाओं को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि 2024-25 के केंद्रीय बजट में झारखंड को रेलवे परियोजनाओं के लिए ₹9,853 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिसमें रांची और हटिया सहित कई स्टेशनों का आधुनिकीकरण प्रस्तावित है। जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार के कारण झारखंड राष्ट्रीय औसत से नीचे है, जो शर्मनाक है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत राज्य में 10,000 किमी से अधिक ग्रामीण सड़कों का निर्माण हुआ है। वहीं खनन प्रभावित क्षेत्रों के लिए डीएमएफटी योजना के तहत ₹12,000 करोड़ से अधिक की राशि झारखंड को मिली है। मनरेगा के तहत केंद्र ने ₹86,000 करोड़ का बजट दिया है, जिसमें झारखंड को उसकी मांग के अनुसार पैसा मिला है, लेकिन कार्यों में देरी और भ्रष्टाचार के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार है। जनजातीय मामलों के मंत्रालय ने भी ₹1,200 करोड़ से अधिक राशि का आवंटन झारखंड को किया है, जिसका समुचित उपयोग नहीं होना प्रशासनिक अक्षमता का प्रमाण है।
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सरकार मांग रही पैसे लेकिन मंत्री कह रहे विभाग नहीं खर्च कर पा रहा पैसा
प्रतुल ने कहा कि 15वें वित्त आयोग के तहत 2021-26 तक झारखंड को ₹31,000 करोड़ से अधिक की राशि मिली है, बावजूद इसके राज्य सरकार पैसे खर्च नहीं कर पा रही है। उन्होंने वित्त मंत्री की उस स्वीकारोक्ति का भी हवाला दिया, जिसमें बताया गया है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष के तीन महीने बीतने के बाद भी कई विभागों का खर्च शून्य है, जिनमें कृषि विभाग भी शामिल है। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि झामुमो एक तरफ केंद्र से पैसे की मांग कर रही है और दूसरी तरफ खुद उसके मंत्री स्वीकार कर रहे हैं कि विभाग पैसा खर्च नहीं कर पा रहे।
पूर्णिया की घटना पर भी जताई चिंता
बिहार के पूर्णिया जिले में हुई घटना को लेकर प्रतुल शाहदेव ने दुख व्यक्त किया और कहा कि बिहार सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज की है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। उन्होंने बताया कि एनसीआरबी के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार में अपराध दर 2012-14 (यूपीए शासनकाल) की तुलना में 2024 में 30% घटी है। प्रतुल ने झारखंड सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले साढ़े पांच वर्षों में राज्य में 8000 से अधिक बलात्कार की घटनाएं हुई हैं, जिनमें एक तिहाई पीड़ित आदिवासी बेटियां थीं। उन्होंने इसे आबुआ सरकार की नाकामी करार दिया।












