नई दिल्ली: भारत के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अपने पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजे गए अपने त्यागपत्र में कहा कि यह निर्णय उन्होंने “स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने” के लिए लिया है। धनखड़ का यह अप्रत्याशित कदम संसद के मॉनसून सत्र के पहले ही दिन आया, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं और अटकलों का दौर तेज हो गया है।
राष्ट्रपति भवन द्वारा जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही नए उपराष्ट्रपति के चयन की प्रक्रिया जल्द शुरू होने के संकेत मिले हैं।
स्वास्थ्य वजह या कुछ और? उठे सवाल
धनखड़ का इस्तीफा विपक्षी दलों के लिए भी चौंकाने वाला रहा। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “उपराष्ट्रपति का त्यागपत्र जितना अप्रत्याशित है, उतना ही अस्पष्ट भी। इसके पीछे के कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।” उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें अपना फैसला वापस लेने के लिए मना सकते हैं।
धनखड़ के राजनीतिक सफर पर नजर डालें तो वह अगस्त 2022 में भारत के 14वें उपराष्ट्रपति बने थे। अपने कार्यकाल के दौरान विपक्ष के साथ कई बार उनका टकराव हुआ। मार्च 2025 में AIIMS दिल्ली में उनकी एंजियोप्लास्टी हुई थी, जिसके बाद से उनकी तबीयत को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही।
संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 68(2) के अनुसार, उपराष्ट्रपति पद रिक्त होने की स्थिति में “यथाशीघ्र” चुनाव कराए जाने चाहिए। नए उपराष्ट्रपति का चयन संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों द्वारा किया जाएगा। इस दौरान राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह, जो जनता दल (यूनाइटेड) के सांसद हैं, को कार्यवाहक सभापति के रूप में भूमिका निभानी पड़ सकती है।
अगला उपराष्ट्रपति कौन? संभावित नामों पर नजर
सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन के पास लोकसभा और राज्यसभा दोनों में बहुमत है। ऐसे में भाजपा के पास कई वरिष्ठ नेता और राज्यपाल विकल्प के रूप में मौजूद हैं। चर्चा में हरिवंश नारायण सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। इसके अलावा पार्टी किसी ऐसे चेहरे को चुन सकती है जो संगठन के भीतर स्वीकार्य हो और विवादों से दूर रहे।
तीन उपराष्ट्रपति जिन्होंने बीच में छोड़ा पद
धनखड़ ऐसे तीसरे उपराष्ट्रपति हैं जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दिया है। उनसे पहले वी.वी. गिरी (1969) और भैरोंसिंह शेखावत (2007) ने पद छोड़ा था।
अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि एनडीए किसे अगला उपराष्ट्रपति चुनता है और क्या यह फैसला किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत देगा।













