Bihar News: बिहार विधानसभा में गुरुवार को CAG की रिपोर्ट पेश की गई. इसमें कहा गया है कि 31 मार्च 2024 तक 49,649 उपयोगिता प्रमाणपत्र लंबित हैं. ये प्रमाणपत्र विभिन्न सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों में खर्च की गई राशि के संबंध में होते हैं, जिन्हें तय समय पर संबंधित विभागों को महालेखाकार कार्यालय में जमा करना अनिवार्य होता है.
कर्ज में भी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य की देनदारियों में पिछले वर्ष की तुलना में 12.34% की वृद्धि हुई है. यह दिखाता है कि राज्य सरकार का वित्तीय प्रबंधन कमजोर है और पारदर्शिता के दावे खोखले साबित हो रहे हैं.
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विपक्ष का हमला: “घोटालों की सरकार है”
पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने इस CAG रिपोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब से नरेंद्र मोदी की सरकार आई है, तब से घोटाले ही घोटाले हो रहे हैं. बिहार की सरकार ने भी शुरू से सिर्फ भ्रष्टाचार ही किया है. देश की संपत्तियों को धीरे-धीरे बेच दिया गया.
सालों से अटकी फाइलें और अधूरा बजट खर्च
CAG रिपोर्ट में यह भी खुलासा हुआ है कि ₹14,452.38 करोड़ की राशि 2016-17 या उससे भी पहले की है, जिसका अब तक कोई हिसाब नहीं दिया गया है. वित्त वर्ष 2023-24 में बिहार का कुल बजट ₹3.26 लाख करोड़ था, लेकिन सरकार केवल ₹2.60 लाख करोड़ (79.92%) ही खर्च कर पाई. बची हुई ₹65,512.05 करोड़ की राशि में से सिर्फ 36.44% यानी ₹23,875.55 करोड़ ही कोषागार में वापस हुई.













