Business News: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट में इस बार कोई बदलाव नहीं किया है। इसे 5.5% पर स्थिर रखा गया है, जिसका सीधा असर यह होगा कि लोन महंगे नहीं होंगे और आपकी EMI में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
इसका ऐलान RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 अगस्त को किया। यह निर्णय 4 से 6 अगस्त तक चली मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक के बाद लिया गया।
सभी सदस्यों की सहमति से लिया गया फैसला
गवर्नर मल्होत्रा ने बताया कि सभी सदस्यों ने ब्याज दरों को यथावत रखने पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि टैरिफ अनिश्चितता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। रेपो रेट में कोई बदलाव न होने का मतलब है कि बैंकिंग सेक्टर में फिलहाल ब्याज दरें स्थिर रहेंगी।
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रेपो रेट क्या है?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इस दर में बदलाव से लोन और EMI की लागत पर सीधा असर पड़ता है। रेपो रेट स्थिर रहने का अर्थ है कि बैंक न तो अपने लोन सस्ते करेंगे और न ही महंगे।
गवर्नर ने क्या कहा?
RBI गवर्नर ने कहा कि भारत में मानसून अच्छा चल रहा है और त्योहारों का सीजन नजदीक है। ये दोनों कारक आर्थिक गतिविधियों में तेजी लाने में सहायक होंगे।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि ग्लोबल ट्रेड में अभी भी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं कुछ हद तक कम हुई हैं।
इस साल अब तक 1% की कटौती
वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक तीन बार रेपो रेट में कटौती हो चुकी है:
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फरवरी में 6.5% से घटाकर 6.25%
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अप्रैल में 0.25% की कटौती
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जून में 0.50% की कटौती
यानि कुल मिलाकर 1% की कटौती अब तक की जा चुकी है।
RBI रेपो रेट क्यों बढ़ाता या घटाता है?
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महंगाई अधिक होने पर रेपो रेट बढ़ाई जाती है, जिससे मनी फ्लो घटता है और डिमांड कम होती है।
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आर्थिक मंदी के समय रेपो रेट घटाई जाती है, जिससे लोन सस्ते होते हैं और बाजार में नकदी बढ़ती है।
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MPC की बैठक हर दो महीने में
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) में 6 सदस्य होते हैं, जिनमें 3 RBI से और 3 केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 6 बैठकें प्रस्तावित हैं। पहली बैठक अप्रैल में हो चुकी है और यह अगस्त वाली दूसरी बैठक थी।













