Jharkhand News: सूर्या हांसदा एनकाउंटर केस में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाते हुए गोड्डा के डीसी और एसपी से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट तलब की है। यह कार्रवाई आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव संजय मेहता द्वारा आयोग में दायर शिकायत पर की गई है। आयोग की इस सक्रियता से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद जगी है।
आयोग ने माना गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता में सुनवाई करते हुए शिकायत में लगाए गए आरोपों को मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना है। आयोग ने इस मामले में मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत संज्ञान लिया है और आवश्यक कार्रवाई की शुरुआत कर दी है।
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शिकायत के आधार पर आयोग की कार्यवाही:
- 20 अगस्त 2025: आजसू नेता संजय मेहता ने NHRC में शिकायत दर्ज की।
- 27 अगस्त 2025: आयोग ने शिकायत को संज्ञान में लिया।
- 29 अगस्त 2025: आयोग ने विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया। महानिदेशक (जांच) को पत्र भेजा गया।
- 02 सितंबर 2025: गोड्डा के डीएम और एसपी को नोटिस जारी, 4 सप्ताह में एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी गई।
मुठभेड़ की रिपोर्ट समय पर क्यों नहीं दी गई? आयोग ने मांगा स्पष्टीकरण
आयोग ने गोड्डा पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि मुठभेड़ की सूचना आयोग को निर्धारित समय सीमा में क्यों नहीं दी गई। यह आयोग की गाइडलाइंस का उल्लंघन माना जा रहा है, जिसे लेकर पुलिस अधीक्षक से जवाब मांगा गया है।
आजसू का दावा – “सच और न्याय की लड़ाई जारी रहेगी”
इस मामले पर आजसू नेता संजय मेहता ने कहा “हम यह लड़ाई कानूनी और न्यायिक तरीके से लड़ रहे हैं। आयोग की गंभीरता से न्याय की उम्मीद जगी है। जब पुलिस कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं करती और खुद ही न्याय करने लगती है, तो समस्या गंभीर हो जाती है। आज आदिवासी और मूलवासी समुदाय गोलियों का शिकार हो रहे हैं, जो पुलिसिया बर्बरता को दर्शाता है।”
संजय मेहता ने आगे कहा कि यह सिर्फ एक केस नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों और पुलिस व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा सवाल है।












