Natiional News: देशभर में इन दिनों एक ही बात की गूंज जोर से उठ रही है.E20 पेट्रोल कोई कह रहा है माइलेज खा गया!, तो कोई बोल रहा है इंजन फाड़ दिया!। ट्विटर से लेकर इस्टाग्राम तक केवल इसी को लेकर, चर्चा है – ऐसे में हम आज इसी मुद्दे पर बात करेंगे कि आखिर ये ई-20 का झोल है क्या ? आईए जानते है।
सरकार का कहना है – भैया, ये तो क्रांति है! खेत से तेल, और वो भी देसी!
लेकिन जनता का सवाल – साहब, माइलेज के बारे में भी तो कुछ बताइए!
दरअसल देश में इन दिनों 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल यानी E20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज हो गई है। सरकार जहां इसे ऊर्जा सुरक्षा, किसानों की आय वृद्धि और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में क्रांतिकारी कदम बता रही है, वहीं आम जनता, खासतौर पर पुराने वाहनों के मालिक, इसके प्रभावों को लेकर चिंतित हैं।
ऐसे में पहले जानते है कि आखिर क्या है E20 पेट्रोल?
E20 पेट्रोल में 80% पारंपरिक पेट्रोल और 20% इथेनॉल मिलाया जाता है। इथेनॉल गन्ना, मक्का जैसे कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है, जो कि एक नवीकरणीय ईंधन है। भारत सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जाए, जिससे देश की तेल आयात पर निर्भरता घटे और किसानों को नया बाजार मिले।
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इसमें केंद्र सरकार का दावा है कि E20 पेट्रोल देश की अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद है। इससे:
1. कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम होगा,
2. विदेशी मुद्रा की बचत होगी,
3. और किसानों को इथेनॉल उत्पादन से आय का नया स्रोत मिलेगा।
सरकार के अनुसार, E20 के प्रयोग से पर्यावरण पर भी सकारात्मक असर पड़ेगा, क्योंकि इथेनॉल जलने पर कार्बन उत्सर्जन कम होता है। सरकार यह भी कहती है कि यह ईंधन मौजूदा वाहनों के इंजन में बिना किसी बड़े बदलाव के इस्तेमाल किया जा सकता है।













