झुमरी तिलैया (कोडरमा) — गायत्री शक्तिपीठ झुमरी तिलैया के तत्वावधान में आयोजित ज्योति कलश रथ यात्रा रविवार को श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से भरपूर रही। रथ यात्रा की शुरुआत विधिवत पूजन और आरती के साथ हुई, इसके पश्चात यात्रा ने शहर के विभिन्न मोहल्लों – तिलैया बस्ती, इंदरवा बस्ती, असनाबाद और करमा का भ्रमण करते हुए चाराडीह पहुंची, जहां शाम 5 बजे दीप यज्ञ का भव्य आयोजन किया गया।
इस आयोजन में सैकड़ों श्रद्धालु, विशेष रूप से महिलाओं ने भाग लेकर दिव्य ज्योति की आराधना की और आत्मिक शांति का अनुभव किया। दीप यज्ञ के माध्यम से युग निर्माण और चार मूल मूल्यों — समझदारी, ईमानदारी, जिम्मेदारी और बहादुरी को अपनाने का संदेश दिया गया।
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“यह युग संधि का समय है”- परिव्राजक नकुल देव शास्त्री
दीप यज्ञ में उपस्थित परिव्राजक नकुल देव शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय परिवर्तन का काल है, जिसे युग संधि काल कहा जा सकता है। उन्होंने गायत्री मंत्र को चरित्र निर्माण का मूल मंत्र बताते हुए कहा कि इसके जाप से व्यक्ति में साहस, धैर्य और ऊर्जा का संचार होता है। उन्होंने चेताया कि दैविक प्रकोप से बचने का एकमात्र उपाय है — ईश्वर विश्वास और सत्कर्म।
उन्होंने समाज से आह्वान किया कि सिर्फ भवन, मंदिर या आश्रम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और नैतिक जागरूकता ही आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
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रथ यात्रा बनी जन-जन की यात्रा
यात्रा में गायत्री शक्तिपीठ के युवा कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। ज्ञान रथ, झंडा और बैनर के साथ निकली यात्रा में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता था। यह आयोजन न सिर्फ एक धार्मिक यात्रा, बल्कि एक सकारात्मक सामाजिक अभियान के रूप में सामने आया।












