Ranchi: झारखंड की राजधानी का बिरसा मुंडा एयरपोर्ट राज्य का सबसे व्यस्त हवाई अड्डा बन चुका है, लेकिन बढ़ते ट्रैफिक और यात्रियों की संख्या के मुकाबले यहां की सुविधाएं अब भी सीमित हैं। यात्रियों का कहना है कि एयरपोर्ट पर मिनट-मिनट का शुल्क तो वसूला जाता है, लेकिन बदले में उन्हें न तो पर्याप्त पार्किंग की सुविधा मिलती है, न ही सुरक्षा और व्यवस्था का भरोसा।
एयरपोर्ट परिसर में अक्सर पार्किंग की कमी, ट्रैफिक जाम और आवारा कुत्तों की समस्या देखने को मिल रही है। वहीं, यात्रियों का आरोप है कि एयरपोर्ट प्रशासन शुल्क वसूली में तो तत्पर है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर उतना ध्यान नहीं दिया जा रहा।
स्ट्रीट डॉग्स का आतंक, यात्रियों में दहशत
1 नवंबर की शाम करीब पांच बजे एयरपोर्ट परिसर के बाहर लगभग आधा दर्जन आवारा कुत्तों ने यात्रियों और परिजनों के बीच अफरा-तफरी मचा दी। लगातार भौंकते और दौड़ते इन कुत्तों को देखकर कई लोग डरकर किनारे हट गए। चौंकाने वाली बात यह रही कि एयरपोर्ट कर्मचारी और ट्रैफिक कंट्रोल कर्मी इस दौरान पूरी तरह लापरवाह नजर आए।
मिनट के हिसाब से शुल्क, फिर भी नहीं व्यवस्था
एयरपोर्ट गेट में प्रवेश करते ही वाहनों को एक टिकट दिया जाता है, जिसमें सेकंड तक का समय दर्ज रहता है। जैसे ही आप किसी को छोड़कर या रिसीव कर वापस निकलते हैं, गेट पर वाहनों की लंबी लाइन मिलती है। इसका मतलब है कि आपका “पेड टाइम” बढ़ता जाता है।
थोड़ी सी देरी होने पर माइक से गाड़ी लॉक करने की चेतावनी दी जाती है। वहीं, पार्किंग में गाड़ी लगाने पर 80 रुपये तक वसूले जाते हैं। यात्रियों का कहना है कि “पैसे लेने में तत्परता है, लेकिन कुत्तों और अव्यवस्था से सुरक्षा देने में कोई दिलचस्पी नहीं।”
पार्किंग की समस्या और बढ़ता खतरा
रांची एयरपोर्ट में फिलहाल दो पार्किंग हैं — एक एयरपोर्ट अथॉरिटी की और दूसरी प्राइवेट एजेंसी की। दोनों मिलाकर अधिकतम 200 से 300 वाहनों की क्षमता है। लेकिन रोजाना 1000 से ज्यादा गाड़ियां एयरपोर्ट पहुंचती हैं। नतीजतन कैब ड्राइवर और टैक्सी चालक सड़क किनारे वाहन खड़े करने को मजबूर हैं।
इस वजह से एयरपोर्ट रोड पर ट्रैफिक जाम और एक्सीडेंट की घटनाएं आम हो गई हैं। पिछले एक साल में कई सड़क हादसे हो चुके हैं, जिनमें कुछ लोगों की जान तक चली गई है और कई घायल हुए हैं।
यात्रियों की सुरक्षा पर उठे सवाल
यात्रियों और परिजनों का कहना है कि एयरपोर्ट प्रशासन को केवल शुल्क वसूली की चिंता है, जबकि सुरक्षा, स्वच्छता और व्यवस्था को लेकर कोई गंभीरता नहीं दिखाई देती। अगर जल्द ही पार्किंग और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो यह स्थिति यात्रियों के लिए और खतरनाक हो सकती है।













