Gurunanak Jayanti 2025: पंद्रहवीं सदी की बात है। एक साधारण-से गाँव तलवंडी (अब पाकिस्तान में ननकाना साहिब) में जन्मे गुरु नानक बचपन से ही असाधारण थे। वे बचपन से ही यह मानते थे कि ईश्वर सबमें समान रूप से बसता है — चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान।
एक दिन, जब वे लगभग 30 वर्ष के थे, गुरु नानक रोज़ की तरह ब्यास नदी में स्नान करने गए। लेकिन उस दिन कुछ चमत्कारिक हुआ — वे नदी में उतरते ही गायब हो गए। तीन पूरे दिन तक उनका कोई पता नहीं चला। गाँव में अफरा-तफरी मच गई। लोग सोचने लगे कि गुरु नानक डूब गए होंगे।
तीन दिन बाद जब वे वापस लौटे, उनके चेहरे पर एक अलौकिक तेज़ था। उन्होंने चुप्पी तोड़ी और कहा, “ना कोई हिंदू, ना मुसलमान। बस एक ही ईश्वर है, जो सबका है।”
इसके बाद उन्होंने अपने जीवन को मानवता, समानता और प्रेम के प्रचार में समर्पित कर दिया। उन्होंने जात-पात, धर्म, और ऊँच-नीच की दीवारें तोड़ीं और सिख धर्म की नींव रखी। उन्होंने सिखाया कि सेवा (Service), नाम जपना (Meditation), और वंड छकना (Sharing) ही जीवन का सच्चा मार्ग है।













