Jharkhand Health News: झारखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। 15वें वित्त आयोग की अनुशंसा पर 354.01 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की गई है। राज्य स्वास्थ्य विभाग ने भी इस संबंध में आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है।
इस राशि का उपयोग उप-स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC), ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य इकाइयों (BPHU) के भवन निर्माण के लिए किया जाएगा। सभी जिलों के डीसी, सिविल सर्जन और स्वास्थ्य संस्थानों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि स्वीकृत फंड का उपयोग केवल निर्माण कार्य व तय योजना के अनुसार ही किया जाए।
वर्षों से अधूरे और जर्जर सरकारी भवन बने चिंता का कारण
स्वास्थ्य केंद्रों के निर्माण के लिए नए बजट का आवंटन भले ही बड़ी राहत है, लेकिन झारखंड में कई ऐसे सरकारी भवन पहले से मौजूद हैं जो वर्षों से अधूरे या हैंडओवर न होने के कारण बेकार पड़े हैं।
ओरमांझी के पांचा में 7 करोड़ की लागत से बना CHC-13 साल बाद भी बेकार
रांची के ओरमांझी स्थित पांचा पंचायत भवन के सामने करीब 13 वर्ष पहले 7 करोड़ की लागत से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था।
लेकिन आज तक यह भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंडओवर नहीं किया गया।
मुख्य समस्याएँ:
- अस्पताल तक जाने के लिए सड़क ही नहीं बनाई गई
- पहाड़ी पर स्थित भवन तक उचित मार्ग का अभाव
- अधिकारियों ने CHC शिफ्ट करने से इनकार किया
- तीन भवनों के आसपास घना जंगल बन गया
- नौ वर्षों से भवन के भीतर कोई प्रवेश तक नहीं कर पाया
भवन पूरी तरह बेकार और जर्जर स्थिति में पहुंच चुका है।
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रांची सदर अस्पताल में डॉक्टर्स क्वार्टर-17 साल से अधूरा, दीवारें दरकीं, सीपेज बढ़ा
रांची सदर अस्पताल परिसर में वर्षों पहले डॉक्टरों के रहने के लिए बहुमंजिला क्वार्टर बनाया गया था।
- भवन की नींव 2008 में रखी गई
- लक्ष्य था कि 2010–2011 तक इसे हैंडओवर कर दिया जाए
- DPR लगभग 20 करोड़ रुपये की थी
लेकिन निर्माण कार्य मानकों के अनुरूप न होने के कारण भवन हैंडओवर नहीं हुआ। अब स्थिति यह है कि—
- 70–80% दीवारें और छतें सीपेज से खराब
- कई फ्लोर की दीवारें दरक चुकीं
- इमारत के चारों ओर उगे पेड़ों की जड़ें संरचना को कमजोर कर रही हैं
13+ साल बाद भी यह 7 मंजिला इमारत अधूरे और बेकार रूप में खड़ी है।
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पुराने अव्यवस्थित भवनों के बीच नए फंड का उपयोग बड़ी जिम्मेदारी
राज्य में कई स्वास्थ्य भवन वर्षों से तैयार होने के बावजूद उपयोग में नहीं लिए जा सके। नए फंड जारी होने से उम्मीदें बढ़ी हैं, लेकिन इन पुराने अधूरे प्रोजेक्ट्स को देखते हुए निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और हैंडओवर प्रक्रिया को मजबूत करना अब अनिवार्य हो गया है।












