Jharkhand News: झारखंड में पेसा (PESA) नियमावली के लागू होने का मार्ग अब लगभग खुल चुका है। तीन मंत्रियों और खान एवं भूतत्व विभाग द्वारा उठाई गई आपत्तियों का समाधान कर लिया गया है। पंचायती राज विभाग ने नियमावली का ड्राफ्ट तैयार कर उसे मंजूरी के लिए कैबिनेट सचिवालय को भेज दिया है। उम्मीद जताई जा रही है कि कैबिनेट की अगली बैठक में इसे हरी झंडी मिल जाएगी।
गौर करने वाली बात यह है कि PESA नियमावली के लागू करने को लेकर हाईकोर्ट में अवमानना याचिका भी चल रही है। हाईकोर्ट कई बार राज्य सरकार को इसे लागू करने का निर्देश दे चुका है और 9 सितंबर को लघु खनिज आवंटन पर रोक भी लगा दी थी। इस मामले की अगली सुनवाई 4 दिसंबर को है।
क्यों अटका था पेसा नियमावली का प्रस्ताव?
PESA कानून 1996 में पारित हुआ था, ताकि अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत किया जा सके। लेकिन झारखंड में अब तक इसकी नियमावली तैयार नहीं की जा सकी थी। मंत्रियों और विभागों की आपत्तियों के कारण यह मसला वर्षों से अटका हुआ था।
अब सरकार ने विभागीय समिति बनाकर सभी आपत्तियों का समाधान कर दिया है।
जानिए-किसकी क्या आपत्ति थी और कैसे निकला समाधान
1. कल्याण मंत्री चमरा लिंडा की आपत्तियाँ
- एक राजस्व ग्राम में केवल एक ग्राम सभा हो
- ग्राम सभा का कोरम 2/3 हो
- ग्राम सभा अध्यक्ष का पद ST के लिए आरक्षित हो
- ‘पड़हा’ परंपरा और ग्राम सभा की शक्तियों का स्पष्ट उल्लेख
- ग्राम सभा के निर्णयों को विभागीय मान्यता
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विभागीय समाधान
- हर गांव में केवल एक ग्राम सभा होगी
- ग्राम सभा में वही लोग शामिल होंगे जिनके नाम पंचायत की निर्वाचन सूची में हैं
- झारखंड में वर्तमान कोरम 1/3 है—इसे बढ़ाने से व्यावहारिक समस्या होगी
- अन्य राज्यों में भी कोरम कम है (गुजरात—1/10, मध्य प्रदेश—1/4, छत्तीसगढ़—1/3 आदि)
- ग्राम सभा अध्यक्ष का पद ST के लिए आरक्षित रहेगा; जहां ST नहीं है वहां अपवाद लागू
2. कई विभागों की आपत्ति: झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 के तहत नियमावली बनाना उचित नहीं
कहा गया कि पेसा नियमावली अलग अधिनियम के तहत बने और एक ही क्षेत्र में कई ग्राम सभा होने से विसंगति होगी।
साथ ही ग्राम सभा कोरम 50% और महिलाओं की 1/3 अनिवार्य उपस्थिति को अव्यावहारिक बताया गया।
विभागीय समाधान
- 10 में से 9 राज्यों ने अपने-अपने पंचायती राज अधिनियम के तहत ही पेसा नियमावली बनाई है
- झारखंड पंचायत राज अधिनियम 2001 की वैधानिकता को अदालतों ने स्वीकार किया है
- इसलिए इसी अधिनियम के तहत नियमावली बनाना पूरी तरह संवैधानिक है
3. भू-राजस्व मंत्री दीपक बिरुआ की आपत्तियाँ
- निजी साहूकारी निषेध अधिनियम, 2016 अनुसूचित क्षेत्रों में स्वतः लागू नहीं होता
- पंचायत राज अधिनियम, 2001 की ग्राम सभा को अनुसूचित क्षेत्रों में शून्य माना जाना चाहिए
- पेसा में ग्राम सभा को शक्तियाँ हैं, लेकिन नियमावली उन्हें सीमित कर रही है
PESA नियमावली लागू होने से क्या बदलेगा?
- अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाएँ अधिक सशक्त होंगी
- भूमि, लघु खनिज, स्थानीय संसाधनों पर निर्णय ग्राम सभा की भूमिका से होंगे
- परंपरागत सामाजिक व्यवस्थाओं को मान्यता मिलेगी
- पंचायत स्तर पर आत्मनिर्भरता और अधिकारों में वृद्धि होगी
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