Jharkhand News: झारखंड भारत के उन राज्यों में शामिल है जहां आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और परंपराएं आज भी जीवंत हैं। यहां मनाए जाने वाले पारंपरिक त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं होते, बल्कि कृषि, जंगल, जल और सामुदायिक जीवन से गहराई से जुड़े होते हैं।
इस लेख में हम आपको Jharkhand Traditional Festivals 2026 का पूरा कैलेंडर, तिथियां और प्रत्येक पर्व का सांस्कृतिक महत्व विस्तार से बता रहे हैं।
Sarhul Festival- सरहुल पर्व
संभावित तिथि: 21 मार्च 2026
समुदाय: मुंडा, उरांव, हो और अन्य आदिवासी समाज
सरहुल झारखंड का सबसे प्रमुख आदिवासी पर्व है। यह पर्व साल (सखुआ) वृक्ष की पूजा के साथ मनाया जाता है और नए वर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन पाहन (पुजारी) देवसरना में पूजा कर गांव की सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना करते हैं।
Baha Parab- बाहा पर्व
संभावित तिथि: मार्च–अप्रैल 2026
समुदाय: संथाल
बाहा पर्व को फूलों का त्योहार कहा जाता है। यह पर्व प्रकृति में नए फूलों के खिलने और ऋतु परिवर्तन का उत्सव है। इस दिन गांवों में नृत्य, गीत और सामूहिक भोज का आयोजन होता है।
Rohini Parab- रोहिणी पर्व
संभावित तिथि: मई 2026
महत्व: कृषि एवं प्रकृति संरक्षण
रोहिणी पर्व के दिन धरती माता को विश्राम देने की परंपरा है। इस दिन खेत जोतना वर्जित माना जाता है। यह पर्व प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है।
Karma Festival 2026- करमा पर्व
संभावित तिथि: 23 सितंबर 2026
समुदाय: उरांव, मुंडा, हो
करमा पर्व भाई-बहन के प्रेम, सामाजिक एकता और विश्वास का प्रतीक है। करम वृक्ष की पूजा की जाती है और युवतियां अपने भाइयों की लंबी उम्र की कामना करती हैं।
Sohrai Festival- सोहराय पर्व
संभावित तिथि: 12 जनवरी 2026
महत्व: फसल और पशुधन उत्सव
सोहराय पर्व झारखंड का प्रमुख फसल उत्सव है। इस दौरान पशुओं की पूजा की जाती है और घरों की दीवारों पर प्रसिद्ध सोहराय पेंटिंग बनाई जाती है, जो आज अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुकी है।
Tusu Parab- टुसू पर्व
संभावित तिथि: 14 जनवरी 2026
महत्व: लोकगीत और सामूहिक उत्सव
टुसू पर्व खासकर युवतियों द्वारा मनाया जाता है। लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक गीतों के माध्यम से नई फसल और नए साल का स्वागत किया जाता है।
Maghe Parab-माघे पर्व
संभावित तिथि: जनवरी 2026
महत्व: नया कृषि वर्ष
माघे पर्व नए कृषि चक्र की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं और सामाजिक मेल-मिलाप को बढ़ावा दिया जाता है।
झारखंड के पारंपरिक त्योहारों का सांस्कृतिक महत्व
झारखंड के त्योहार प्रकृति संरक्षण, सामाजिक एकता और सामूहिक जीवन की भावना को मजबूत करते हैं। ये पर्व आदिवासी समाज की पहचान हैं और आने वाली पीढ़ियों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का कार्य करते हैं।












