Jharkhand news: केन्द्र की भाजपा सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को निरस्त करने के लिए एक विधेयक पेश करने का प्रस्ताव लाया है। यह अत्यंत चिंताजनक और सुनियोजित कदम है। मनरेगा जन आंदोलनों से जन्मा कानून है। जो हर हाथ काम दो, काम का पूरा दाम दो के वादे को दर्शाता है। यह कानून में गांव में रहने वाले लोगों को काम मांगने का कानूनी अधिकार दिया। पूरे ग्रामीण भारत में सौ दिनों के रोजगार की गारंटी को सुनिश्चित की। विकेन्द्रीकृत शासन को मजबूत किया। महिलाओं और भूमिहीनों को सशक्त बनाया। इसके माध्यम से श्रम की गरिमा को कायम रखा।
महात्मा गांधी का नाम हटाना षड्यंत्र है
अब इस अधिनियम से महात्मा गांधी का नाम हटाना यह षड्यंत्र से कम नहीं है। गांधी जी श्रम की गरिमा, सामाजिक न्याय, और सबसे गरीबों के प्रति नैतिक जिम्मेदारी की प्रतीक रहे है। यह नाम परिवर्तन गांधी जी के मूल्यों के प्रति भाजपा और आरएसएस की असहजता और अविश्वास को दर्शाता है। एक जनकेंद्रित कल्याणकारी कानून से राष्ट्रपिता के जुड़ाव को मिटाने का प्रयास है। कांग्रेस ने इसे काफी गंभीरता से लिया है।
राकेश सिन्हा ने क्या कहा
उक्त आशय की जानकारी देते हुए प्रदेश कांग्रेस कमिटी के महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि इसी बावत अखिल भारतीय कांग्रेस कमिटी के निर्देश के आलोक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने राज्य के सभी जिलाध्यक्षों को यह निर्देशित किया है कि कल 17 दिसंबर 2025 को सभी जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन आयोजित कर महात्मा गांधी के नाम और मूल्यों को मिटाने के प्रयास के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक करें तथा यह जनता के बीच स्पष्ट करें कि नया कानून श्रमिकों को किस प्रकार प्रभावित करेगा।
इसके अलावा 28 दिसंबर 2025 को कांग्रेस के स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य के सभी जिला मंडल, और गांव स्तर पर महात्मा गांधी के चित्रों के साथ कार्यक्रम आयोजित की जाएगी जिस कार्यक्रम के माध्यम से श्रम की गरिमा और सामाजिक न्याय और काम के अधिकार के प्रति कांग्रेस पार्टी की प्रतिबद्धता पूरी मजबूती के साथ दोहराया जाए।












