New Year 2026: साल 2025 अब खत्म होने को है। 2026 नया साल आने को है। हर साल लोग 1 जनवरी को नए साल का स्वागत सभी बड़े उत्साह के साथ करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 1 जनवरी को ही साल की शुरुआत क्यों होती है? यह केवल कैलेंडर बदलने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इसके पीछे हजारों साल का इतिहास, खगोल विज्ञान और धार्मिक बदलाव छिपे हैं।
इतिहासकारों के अनुसार, नए साल की अवधारणा हजारों साल पुरानी है। सबसे पहले लगभग 2000 ईसा पूर्व प्राचीन मेसोपोटामिया सभ्यता में नए साल का आयोजन किया गया था। उस समय नया साल वसंत ऋतु (मार्च के आसपास) में मनाया जाता था, क्योंकि यही समय खेती और नई फसल की शुरुआत का होता था।
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New Year 2026: नए साल की शुरुआत का प्राचीन इतिहास
नए साल को मनाने की परंपरा लगभग 4,000 साल पुरानी है। प्राचीन बेबीलोन (Babylon) में नए साल की शुरुआत वसंत के पहले अमावस्या से मानी जाती थी। उस समय ‘अकितु’ (Akitu) नामक 11 दिनों का उत्सव मनाया जाता था। दिलचस्प बात यह है कि तब नया साल मार्च के महीने में आता था, क्योंकि उस समय प्रकृति पुनर्जन्म ले रही होती थी।
रोमन सभ्यता में कैलेंडर को व्यवस्थित किया गया। पहले रोमन कैलेंडर में मार्च पहला महीना था। लेकिन 46 ईसा पूर्व में रोमन सम्राट जूलियस सीज़र ने जूलियन कैलेंडर लागू किया और जनवरी को साल का पहला महीना घोषित किया। जनवरी का नाम रोमन देवता जानस के नाम पर रखा गया, जिन्हें शुरुआत और अंत का देवता माना जाता था। यहीं से 1 जनवरी को नए साल के रूप में मान्यता मिलने लगी।
रोम के शुरुआती कैलेंडर में भी केवल 10 महीने होते थे और साल मार्च से शुरू होता था। आज भी सितंबर (7वीं), अक्टूबर (8वीं), नवंबर (9वीं) और दिसंबर (10वीं) के नाम लैटिन अंकों पर आधारित हैं, जो इसी पुराने क्रम को दर्शाते हैं।
New Year 2026: जनवरी ही क्यों? जूलियस सीजर का योगदान
46 ईसा पूर्व में, प्रसिद्ध रोमन सम्राट जूलियस सीजर ने कैलेंडर में व्यापक बदलाव किए। उन्होंने सौर चक्र के आधार पर ‘जूलियन कैलेंडर’ पेश किया। सीजर ने ही 1 जनवरी को साल का पहला दिन घोषित किया।
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जनवरी महीने का नाम रोमन देवता ‘जानुस’ (Janus) के नाम पर रखा गया है। जानुस के दो चेहरे थे-एक आगे की ओर देखता था (भविष्य) और दूसरा पीछे की ओर (अतीत)। इसलिए, यह महीना पुरानी यादों को पीछे छोड़ने और नई शुरुआत करने का प्रतीक बन गया।
New Year 2026: मध्य काल और ग्रेगोरियन कैलेंडर
मध्य युग के दौरान यूरोप में ईसाइयत के प्रभाव के कारण 1 जनवरी को हटाकर 25 दिसंबर (क्रिसमस) या 25 मार्च को नया साल मनाया जाने लगा था। लेकिन 1582 में पोप ग्रेगरी XIII ने ‘ग्रेगोरियन कैलेंडर’ लागू किया, जिसने लीप वर्ष की विसंगति को सुधारा और फिर से 1 जनवरी को नए साल के रूप में स्थापित किया। आज पूरी दुनिया इसी कैलेंडर का पालन करती है।
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New Year 2026: भारत में नए साल की शुरुआत और विविधता
भारत एक सांस्कृतिक विविधताओं वाला देश है। यहाँ ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी को आधिकारिक तौर पर नया साल मनाया जाता है, जिसकी शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी। अंग्रेजों ने अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए वैश्विक मानकों को अपनाया, जिससे धीरे-धीरे शहरी भारत में 1 जनवरी का चलन बढ़ा।
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हालांकि, भारतीय परंपरा में ‘सांस्कृतिक नया साल’ अलग-अलग राज्यों में अलग समय पर मनाया जाता है:
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चैत्र प्रतिपदा: हिंदू नव वर्ष (विक्रम संवत)।
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गुड़ी पड़वा और उगादि: महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में।
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बैसाखी: पंजाब में।
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पोइला बैशाख: बंगाल में।
New Year 2026: लोग क्यों मनाते हैं नया साल? (मनोवैज्ञानिक पहलू)
नया साल केवल तारीख का बदलना नहीं है, बल्कि यह एक ‘मानसिक रिसेट बटन’ की तरह है।
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नई आशा: यह मनुष्य को अपनी असफलताओं को भूलकर नई शुरुआत करने का मनोवैज्ञानिक संबल देता है।
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संकल्प (Resolutions): लोग बुरी आदतों को छोड़ने और बेहतर इंसान बनने की कसम खाते हैं।
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सामाजिक जुड़ाव: यह उत्सव परिवारों और दोस्तों को एक साथ लाने का एक जरिया है।












