Ranchi: Jharkhand Missing Children Case एक बार फिर सिस्टम पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। राजधानी रांची, जिसे स्मार्ट सिटी के रूप में प्रचारित किया जाता है, उसी शहर के Dhurwa इलाके से दो मासूम भाई-बहन पिछले चार दिनों से रहस्यमय तरीके से लापता हैं, लेकिन अब तक पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है।
Dhurwa थाना क्षेत्र के मौसीबाड़ी इलाके से 7 वर्षीय अंश और 6 वर्षीय अंशिका 2 जनवरी की शाम करीब चार बजे घर से महज 200 मीटर दूर शालीमार बाजार बिस्किट खरीदने निकले थे। यह दूरी इतनी कम थी कि परिवार को कभी अंदेशा ही नहीं हुआ कि बच्चे लौटकर नहीं आएंगे।
200 मीटर का रास्ता और चार दिन की नाकामी
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब—
- इलाका घनी आबादी वाला है
- शाम का वक्त है
- बाजार में चहल-पहल रहती है
- और रांची स्मार्ट सिटी के दावे किए जाते हैं
तो फिर Dhurwa Missing Kids Case में एक भी ठोस सबूत क्यों नहीं मिला?
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क्या एक भी CCTV कैमरा काम का नहीं?
क्या किसी दुकान, गली, चौक या सड़क पर बच्चों की फुटेज नहीं मिली?
या फिर स्मार्ट सिटी सिर्फ बोर्ड और फाइलों तक ही सीमित है?
पुलिस की तलाश जारी, लेकिन नतीजा शून्य
पुलिस लगातार Dhurwa और आसपास के इलाकों में अनाउंसमेंट कर रही है। गुमशुदा बच्चों की जानकारी देने की अपील की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची एसएसपी ने SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) का गठन किया है।
तलाशी अभियान में—
- सिटी एसपी
- ग्रामीण एसपी
- 5 डीएसपी
- 4 थानों की पुलिस
को लगाया गया है। पुलिस ने जानकारी देने वाले को ₹51,000 इनाम देने की घोषणा की है।
पिता की अपील: बच्चों को लौटा दो
बच्चों के पिता सुनील कुमार का कहना है कि—
“चार दिन से घर में चूल्हा नहीं जला है। अगर कोई मेरे बच्चों को सही-सलामत लौटा देगा तो मैं ₹1 लाख इनाम दूंगा।”
घर में मातम पसरा है। मां की आंखें हर आहट पर दरवाजे की ओर उठ जाती हैं। लेकिन हर बार सिर्फ सन्नाटा हाथ लगता है।
झारखंड में गुमशुदगी और मानव तस्करी का खतरनाक पैटर्न
यह मामला इसलिए और डराता है क्योंकि Jharkhand Missing Children News कोई नई बात नहीं है।
आंकड़े बताते हैं कि पिछले 8 वर्षों में राज्य से 4,765 नाबालिग लापता हुए, जिनमें से 768 बच्चे आज भी ट्रेसलेश हैं।
हर साल—
- 400 से ज्यादा नाबालिग लापता
- 80–100 बच्चों का कभी पता नहीं चलता
सबसे ज्यादा प्रभावित जिले रहे हैं—
गुमला, सिमडेगा, साहिबगंज, रांची, पलामू और पश्चिमी सिंहभूम।
स्मार्ट सिटी में सुरक्षा व्यवस्था फेल?
रांची को स्मार्ट सिटी बताया जाता है, लेकिन Smart City Ranchi Reality इस मामले में सवालों के घेरे में है।
अगर राजधानी के एक प्रमुख इलाके धुर्वा में—
- बच्चे दिनदहाड़े गायब हो जाते हैं
- CCTV से कोई मदद नहीं मिलती
- चार दिन में कोई डिजिटल ट्रेल नहीं मिलता
तो फिर आम नागरिक कितना सुरक्षित है?
क्या यह मानव तस्करी से जुड़ा मामला है?
झारखंड पहले से ही मानव तस्करी का बड़ा केंद्र रहा है। बच्चों को नौकरी, काम और बेहतर जिंदगी का लालच देकर बाहर के राज्यों में बेच दिया जाता है।
दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, बेंगलुरु और गोवा जैसे राज्यों से समय-समय पर झारखंड के बच्चों के रेस्क्यू इसकी गवाही देते हैं।
ऐसे में धुर्वा से दो मासूमों का अचानक गायब होना केवल गुमशुदगी नहीं, बल्कि किसी संगठित गिरोह की आशंका को भी जन्म देता है।
सबसे अहम सवाल
चार दिन बीत चुके हैं, लेकिन—
- कोई CCTV फुटेज नहीं
- कोई चश्मदीद नहीं
- कोई ठोस सुराग नहीं
तो क्या झारखंड में गुमशुदगी अब सामान्य होती जा रही है?
और क्या स्मार्ट सिटी सिर्फ नाम के लिए रह गई है?
जब तक अंश और अंशिका सुरक्षित घर नहीं लौटते, यह मामला सिर्फ दो बच्चों का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का सवाल बना रहेगा।












