Jharkhand News: झारखंड में पेसा नियमावली को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सतीश पौल मुंजनी ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि पेसा को लेकर दिया गया बयान न केवल तथ्यों से परे है, बल्कि आदिवासी समाज के बीच भ्रम और आशंका फैलाने की एक सोची-समझी राजनीतिक कोशिश है।
उनका कहना है कि जिन लोगों ने अपने लंबे कार्यकाल में पेसा कानून को लागू करने की पहल तक नहीं की, वे आज उसी विषय पर उपदेश दे रहे हैं। मुंजनी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा गठबंधन सरकार द्वारा तैयार की गई पेसा नियमावली किसी जल्दबाजी का नतीजा नहीं है।
यह संविधान की भावना, न्यायालयों के दिशा-निर्देशों, जन-संवाद और जनप्रतिनिधियों के व्यापक विमर्श के बाद तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि यह नियमावली आदिवासी स्वशासन को कमजोर नहीं करती, बल्कि ग्राम सभा को कानूनी और संवैधानिक ताकत देती है।
Jharkhand News: आदिवासी परंपराओं और आस्था पर हमले का मुद्दा जानबूझकर उछाला जा रहा है
उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी परंपराओं और आस्था पर हमले का मुद्दा जानबूझकर उछाला जा रहा है। नियमावली में सामाजिक, धार्मिक और पारंपरिक व्यवस्थाओं को पूरा सम्मान दिया गया है। शब्दों की गलत व्याख्या कर डर का माहौल बनाना आदिवासी समाज के साथ अन्याय है।
प्रशासनिक जवाबदेही तय करने को लेकर भी भ्रम फैलाया जा रहा है। मुंजनी के अनुसार, यह व्यवस्था ग्राम सभा के फैसलों को लागू कराने का माध्यम है, न कि उसकी शक्तियों को सीमित करने का प्रयास। जल, जंगल और जमीन के सवाल पर उन्होंने दो टूक कहा कि पेसा के तहत ग्राम सभा की भूमिका पहले से ज्यादा निर्णायक बनाई गई है।
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि झारखंड के 25 वर्षों के इतिहास में पेसा को लागू करने की इच्छाशक्ति पहले कभी नहीं दिखाई गई। आज जब सरकार इसे जमीन पर उतारने की कोशिश कर रही है, तो राजनीतिक विरोध तेज हो गया है।












