Makar Sankranti: भारत त्योहारों की भूमि है, जहां हर पर्व किसी न किसी परंपरा और खास पकवान से जुड़ा होता है। मकर संक्रांति भी ऐसा ही एक प्रमुख पर्व है, जिसका सीधा संबंध तिल-गुड़ के लड्डुओं और पतंगबाजी से है। यह सिर्फ रीति-रिवाज नहीं, बल्कि सेहत और सामाजिक जुड़ाव से भी गहराई से जुड़ा हुआ त्योहार है।
Makar Sankranti पर तिल-गुड़ खाने के फायदे
जनवरी के महीने में पड़ने वाली मकर संक्रांति के दौरान ठंड अपने चरम पर होती है। ऐसे में तिल और गुड़ से बने लड्डू शरीर को अंदर से गर्म रखने में मदद करते हैं।
1. शरीर को मिलती है प्राकृतिक गर्माहट
तिल और गुड़ दोनों की तासीर गर्म होती है। इनका सेवन ठंड से बचाव करता है और सर्दी-जुकाम, जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है।
2. एनर्जी का बेहतरीन स्रोत
गुड़ कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जो लंबे समय तक ऊर्जा देता है। वहीं तिल में मौजूद हेल्दी फैट्स शरीर को एक्टिव बनाए रखते हैं।
3. हड्डियों को करता है मजबूत
तिल में कैल्शियम और मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। यह बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए हड्डियों को मजबूत बनाने में बेहद फायदेमंद है।
4. पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त
गुड़ पाचन एंजाइम्स को सक्रिय करता है, जिससे कब्ज और गैस की समस्या कम होती है। सर्दियों में भारी भोजन के बाद तिल-गुड़ खाना लाभकारी माना जाता है।
5. दिल और त्वचा के लिए लाभकारी
तिल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और अनसैचुरेटेड फैटी एसिड्स दिल की सेहत को बेहतर बनाते हैं। साथ ही यह त्वचा की रूखापन दूर कर प्राकृतिक चमक लाते हैं।
तिल और गुड़ के पोषक तत्व
- तिल: कैल्शियम, मैग्नीशियम, विटामिन B6, विटामिन E, फाइबर
- गुड़: आयरन, विटामिन B-कॉम्प्लेक्स, डिटॉक्सिफिकेशन गुण
Makar Sankranti पर पतंगबाजी क्यों है खास?
मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) पर सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन स्नान, दान और पूजा के साथ-साथ पतंगबाजी का भी विशेष महत्व है।
स्वास्थ्य से जुड़ा कारण
पतंग उड़ाने के बहाने लोग सुबह-सुबह धूप में समय बिताते हैं। यह धूप शरीर को विटामिन-D देती है, इम्युनिटी बढ़ाती है और हड्डियों को मजबूत करती है।
धार्मिक और पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने सबसे पहले मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाई थी, जो इंद्रलोक तक पहुंची। तभी से इस दिन पतंगबाजी की परंपरा चली आ रही है।
खुशी और एकता का प्रतीक
पतंग आसमान में ऊंची उड़ान भरकर सफलता, उम्मीद और आज़ादी का प्रतीक बनती है। ‘काई पो छे’ के शोर के साथ लोग भेदभाव भूलकर खुशियां साझा करते हैं।
पतंगबाजी करते समय रखें ये सावधानियां
- चीनी या कांच लगे मांझे का इस्तेमाल न करें
- पक्षियों की सुरक्षा का ध्यान रखें
- खुले और सुरक्षित स्थान पर ही पतंग उड़ाएं













