रांची: झारखंड विधानसभा की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने कई गंभीर मुद्दों पर राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने तथाकथित “एपस्टीन फाइल” का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले में जांच जारी है और जांच पूरी होने के बाद ही इसे विस्तार से उठाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi का नाम लेते हुए कहा कि इस विषय को तथ्यों के आधार पर ही सामने लाया जाना चाहिए।
राज्यपाल के अभिभाषण पर आपत्ति
Babulal Marandi ने राज्यपाल के अभिभाषण पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि भाषण में सरकार की उपलब्धियों का अत्यधिक बखान किया गया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर भाषण को ध्यान से सुना जाए तो बार-बार “वंदे मातरम्” और सरकार की तारीफ सुनने को मिलती है, जिससे यह दर्शाने की कोशिश की गई कि सरकार का काम बहुत बेहतर है।
Hemant Soren की विदेश यात्रा पर सवाल
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की ‘दावोस यात्रा’ पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर मुख्यमंत्री का देश से बाहर रहना चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि झारखंड की धरती पर Jaipal Singh Munda, Shibu Soren, Birsa Munda, Nilamber Pitamber जैसे महानायकों ने संघर्ष किया। अंग्रेजों और जमींदारों के खिलाफ आदिवासियों ने लंबी लड़ाई लड़ी और अलग राज्य की मांग को लेकर भी संघर्ष जारी रखा।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी आदिवासी समाज “जल, जंगल और जमीन” के लिए संघर्ष कर रहा है।
संथाल परगना में जमीन और उद्योग का मुद्दा
Babulal Marandi ने संथाल परगना में आदिवासियों के कथित शोषण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार को वहां की स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि वहां की परिस्थितियां “छोटा मणिपुर” जैसी लगती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को उनकी खेती की जमीन से बेदखल किया जा रहा है। सरकार को उद्योग वहां लगाने चाहिए जहां आदिवासियों की जमीन प्रभावित न हो। 2024 में गठित भूमि समिति पर भी उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि यह कदम आदिवासियों के हित में नहीं है।
मंत्री का पलटवार
मरांडी के आरोपों पर स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari ने पलटवार करते हुए कहा कि आरएसएस से जुड़े लोग जमीन हड़पने का काम करते हैं।
वहीं विधायक Pradeep Yadav ने बंजर भूमि पर अस्पताल खोलने के प्रस्ताव का समर्थन किया।
डीजीपी नियुक्ति पर विवाद
मरांडी ने राज्य की पुलिस व्यवस्था और डीजीपी नियुक्ति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व डीजीपी को नियमों के विरुद्ध पद पर रखा गया और बाद में नई नियुक्ति भी नियमों के विपरीत की गई।
इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आपत्ति जताते हुए कहा कि डीजीपी नियुक्ति से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर चर्चा उचित नहीं है। सदन में कई विधायकों ने इसका समर्थन किया।
एसीबी जांच और शराब घोटाला
मरांडी ने एसीबी की जांच और कथित शराब घोटाले का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने बिना नाम लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को घेरते हुए कहा कि कई गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन कुछ आरोपियों को डिफॉल्ट बेल मिल गई, जिससे जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।












