Dhanbad: धनबाद के विधायक राज सिन्हा ने झारखंड विधानसभा में महिलाओं के अधिकार, लंबित योजनाओं, कानून व्यवस्था और धनबाद क्षेत्र के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को जोरदार ढंग से उठाया। उन्होंने राज्य सरकार पर महिलाओं और बच्चियों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले लगभग छह वर्षों से राज्य महिला आयोग और झारखंड बाल संरक्षण आयोग में अध्यक्ष व सदस्यों के पद खाली पड़े हैं, जिसके कारण हजारों महिलाएं और बच्चियां न्याय एवं संरक्षण से वंचित हैं।
विधायक राज सिन्हा ने कहा कि सरकार द्वारा चलाई जा रही मंइया सम्मान योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की महिलाओं को प्रतिमाह 2500 रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन आज भी बड़ी संख्या में पात्र महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने बताया कि लगभग आठ लाख से अधिक आवेदन महीनों से लंबित पड़े हैं और कई महिलाएं उम्र सीमा पार होने के कारण योजना से वंचित हो रही हैं। उन्होंने फर्जी तरीके से योजना का लाभ लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की भी मांग की।
राज सिन्हा ने कानून व्यवस्था से जुड़ा एक अहम मामला भी उठाया
सदन में विधायक राज सिन्हा ने कानून व्यवस्था से जुड़ा एक अहम मामला भी उठाया। उन्होंने कहा कि बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम 1981 को वर्ष 2002 में झारखंड सरकार द्वारा अंगीकृत किए जाने के बाद भी इसके प्रावधानों में समयानुकूल बदलाव नहीं किए गए हैं। उन्होंने मांग की कि आर्थिक अपराध, साइबर अपराध, भूमि हथियाना, ऑनलाइन जुआ, मादक पदार्थों का व्यापार, एटीएम से चोरी, अवैध खनन, अवैध शराब की बिक्री और सरकारी जमीन की अवैध बिक्री जैसे अपराधों को भी इस अधिनियम में शामिल किया जाए, ताकि राज्य में कानून व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके।
Dhanbad क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों में देरी का मुद्दा भी सदन में उठाया गया
इसके साथ ही विधायक राज सिन्हा ने ध्यान आकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से धनबाद क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों में हो रही देरी का मुद्दा भी सदन में उठाया। उन्होंने पूजा टॉकीज से जोड़ाफाटक तक प्रस्तावित फ्लाईओवर, तेतुलमारी–भूली आठ लेन सड़क तथा बरवाड्डा–धनबाद फोरलेन मार्ग के बीच स्थित मेमको मोड़ पर आवश्यक सड़क निर्माण में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार किए जाने के बावजूद अब तक प्राक्कलन प्रस्ताव नहीं बन पाया है और न ही परियोजनाओं को तकनीकी व प्रशासनिक स्वीकृति मिली है, जिससे क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
विधायक राज सिन्हा ने नए आपराधिक कानूनों — भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 — के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए झारखंड में जल्द अलग पुलिस अधिनियम लागू करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी झारखंड का अपना पुलिस अधिनियम नहीं होना चिंताजनक है और प्रभावी पुलिस व्यवस्था के लिए इसे शीघ्र लागू किया जाना आवश्यक है।
उन्होंने सरकार से इन सभी मामलों में जल्द कार्रवाई करने की मांग करते हुए कहा कि इससे महिलाओं को न्याय मिलेगा, कानून व्यवस्था मजबूत होगी और क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।












