Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में इन दिनों गैस को लेकर एक अजीब स्थिति बन गई है। एक तरफ कुछ नेता पेट्रोल और एलपीजी के संकट की बात कर रहे हैं, वहीं प्रशासन साफ कह रहा है कि शहर में गैस की कोई कमी नहीं है। लेकिन इन दोनों दावों के बीच फंसी आम जनता की कहानी कुछ और ही है।
कई इलाकों से लोगों की शिकायत है कि गैस सिलेंडर बुक करना ही मुश्किल हो गया है। ऑनलाइन बुकिंग के दौरान OTP नहीं आता, एजेंसियों के फोन नंबर अक्सर बंद मिलते हैं और कई बार कॉल करने पर “सिस्टम डाउन” का जवाब मिलता है। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि आखिर जमीन पर स्थिति क्या है।
मंत्री का साइकिल और रिक्शा वाला विरोध
यह मामला तब चर्चा में आया जब झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री Irfan Ansari विधानसभा सत्र के दौरान एक दिन साइकिल से और अगले दिन रिक्शा से विधानसभा पहुंचे।
मंत्री का कहना था कि देश में पेट्रोल और गैस का संकट है और उसी के विरोध में उन्होंने यह प्रतीकात्मक कदम उठाया है। उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हुए।
मामला यहीं नहीं रुका। मंत्री ने यह भी कहा कि अगर गैस खत्म हो जाए तो लोगों को लकड़ी और कोयले के चूल्हे का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा और तेज हो गई।
“मैं मंत्री हूं… जब मैं कह रहा हूं तो क्राइसिस है”
पत्रकारों ने जब मंत्री से पूछा कि रांची के जिला प्रशासन का कहना है कि गैस की कोई कमी नहीं है, तो फिर वह संकट की बात क्यों कर रहे हैं।
इस सवाल पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा—
“मैं मंत्री हूं… जब मैं कह रहा हूं कि क्राइसिस है तो क्राइसिस है।”
उनका यह बयान अब सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है।
जमीन पर क्या कह रहे हैं लोग
Ranchi के कई मोहल्लों में रहने वाले उपभोक्ताओं का कहना है कि गैस बुकिंग की प्रक्रिया पिछले कुछ दिनों से परेशानी भरी हो गई है।
लोगों का कहना है कि
- ऑनलाइन बुकिंग करने पर OTP नहीं आता
- एजेंसी के नंबरों पर फोन करना मुश्किल है
- कई बार कॉल करने पर जवाब मिलता है कि “सिस्टम डाउन है”
यानी कागज पर व्यवस्था मौजूद है, लेकिन उपभोक्ताओं को गैस पाने में दिक्कतें हो रही हैं।
प्रशासन का दावा – सप्लाई सामान्य
दूसरी ओर रांची जिला प्रशासन का कहना है कि जिले में गैस की सप्लाई सामान्य है और किसी तरह का संकट नहीं है।
इस मामले को लेकर प्रशासन ने गैस एजेंसियों और अधिकारियों के साथ बैठक भी की। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराई जाए और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखी जाए।
साथ ही मैन्युअल बुकिंग के लिए कुछ मोबाइल नंबर भी जारी किए गए हैं।
बीजेपी विधायक ने उठाया 600 गाड़ियों का सवाल
इस पूरे विवाद में राजनीति भी गर्म हो गई है। बीजेपी विधायक Purnima Sahu ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल उठाया है।
उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में पेट्रोल और गैस का संकट है तो हाल ही में झारखंड पुलिस को दी गई करीब 600 नई गाड़ियों में ईंधन कैसे भरा जा रहा है।
उनका कहना है कि सरकार को पहले राज्य की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए और उसके बाद बड़े राजनीतिक मुद्दों पर बयान देना चाहिए।
नई पुलिस गाड़ियां भी बनी चर्चा का विषय
दरअसल हाल ही में झारखंड पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए करीब 600 नई गाड़ियां दी गई हैं। ये गाड़ियां शहर के अलग-अलग इलाकों में गश्त और प्रशासनिक कामों के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं।
इसी को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि अगर ईंधन का संकट इतना बड़ा है तो इन गाड़ियों के संचालन में कोई परेशानी क्यों नहीं दिख रही।
केंद्र सरकार का क्या कहना है
केंद्र सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है। सरकार के अनुसार देश में पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सप्लाई सामान्य रूप से जारी है।
लोगों से यह भी अपील की गई है कि घबराकर ज्यादा बुकिंग न करें ताकि वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
आखिर सच्चाई क्या है?
पूरी स्थिति को देखें तो तीन अलग-अलग दावे सामने आते हैं।
- मंत्री कह रहे हैं कि संकट है
- प्रशासन कह रहा है कि संकट नहीं है
- केंद्र सरकार कह रही है कि गैस की सप्लाई सामान्य है
लेकिन इन सबके बीच आम लोगों को गैस बुकिंग और डिलीवरी में दिक्कतें जरूर महसूस हो रही हैं।
बड़ा सवाल अब भी बाकी
झारखंड विधानसभा में कुल 81 विधायक हैं और सत्र के दौरान हर दिन सैकड़ों गाड़ियां परिसर में आती-जाती हैं। मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों की गाड़ियों के लिए ईंधन की व्यवस्था भी नियमित रूप से होती है।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर सच में पेट्रोल और गैस का संकट है, तो फिर सरकारी व्यवस्था में इसका असर क्यों नहीं दिखाई देता, जबकि आम उपभोक्ताओं को गैस बुकिंग और डिलीवरी में दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
अब पूरा मामला एक अहम सवाल की ओर इशारा कर रहा है। अगर जमीन पर लोगों को परेशानी हो रही है और दूसरी तरफ प्रशासन किसी संकट से इनकार कर रहा है, तो आखिर समस्या कहां है?
क्या यह तकनीकी गड़बड़ी है…
क्या एजेंसियों की लापरवाही है…
या फिर वितरण व्यवस्था में कहीं कोई कमी है?
इन सवालों के बीच अब यह मुद्दा जांच का विषय बनता जा रहा है कि आखिर इस स्थिति के लिए जिम्मेदार कौन है।
फिलहाल रांची में गैस को लेकर शुरू हुई यह बहस सिर्फ सप्लाई या सिस्टम तक सीमित नहीं रह गई है। इसमें राजनीति, प्रशासन और आम लोगों की रोजमर्रा की परेशानी—तीनों एक साथ जुड़ गए हैं।












