विश्वकर्मा पूजा 2026 इस साल 17 सितंबर, गुरुवार को मनाई जाएगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि विश्वकर्मा पूजा के लिए सितंबर की यही तारीख क्यों आती है? क्या 17 सितंबर भगवान विश्वकर्मा की कोई निश्चित जन्मतिथि है?
दरअसल, इसके पीछे कन्या संक्रांति का संबंध है। विश्वकर्मा पूजा की तारीख सामान्य चंद्र कैलेंडर वाले त्योहारों की तरह किसी निश्चित तिथि पर तय नहीं होती, बल्कि इसका संबंध सूर्य के एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश से है।
कन्या संक्रांति क्या होती है?
हिंदू सौर परंपरा में जब सूर्य सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में प्रवेश करता है, तो इसे कन्या संक्रांति कहा जाता है। 2026 में सूर्य का यह राशि परिवर्तन 17 सितंबर की सुबह करीब 7:58 बजे होने की जानकारी पंचांग गणनाओं में दी गई है। इसी दिन कन्या संक्रांति और विश्वकर्मा पूजा दोनों पड़ रहे हैं।
इसी वजह से 2026 में विश्वकर्मा पूजा की तारीख 17 सितंबर है।
क्या हर साल विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को ही होती है?
यहां एक दिलचस्प बात समझना जरूरी है। विश्वकर्मा पूजा को सीधे “हर साल 17 सितंबर” वाला त्योहार मानना पूरी तरह सही नहीं है। इसका संबंध कन्या संक्रांति से होने के कारण इसकी ग्रेगोरियन तारीख में कभी-कभी बदलाव हो सकता है। यानी इसका आधार किसी एक अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख नहीं, बल्कि सूर्य की संक्रांति है।
इसीलिए विश्वकर्मा पूजा आमतौर पर सितंबर के मध्य में दिखाई देती है, लेकिन अलग-अलग वर्षों में तारीख बदल सकती है।
2026 में 16 या 17 सितंबर को लेकर क्यों हुआ भ्रम?
2026 में विश्वकर्मा पूजा की तारीख को लेकर 16 और 17 सितंबर के बीच भ्रम देखने को मिला। इसकी मुख्य वजह यही है कि पर्व का संबंध कन्या संक्रांति के समय से है।
उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार 2026 में कन्या संक्रांति 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे हो रही है और इसी आधार पर विश्वकर्मा पूजा भी 17 सितंबर को मनाई जा रही है।
विश्वकर्मा पूजा और कन्या संक्रांति का क्या रिश्ता है?
विश्वकर्मा पूजा को कन्या संक्रांति के दिन मनाए जाने वाले प्रमुख पर्वों में से एक माना जाता है। पंचांग परंपरा में कन्या संक्रांति सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश का संकेत है और इसी अवसर पर भगवान विश्वकर्मा की पूजा की परंपरा जुड़ी हुई है। इसलिए विश्वकर्मा पूजा की तारीख तय करने को समझने का सबसे आसान तरीका है:
सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश → कन्या संक्रांति → विश्वकर्मा पूजा
सिर्फ इंजीनियर और फैक्ट्री से जुड़ा पर्व नहीं है विश्वकर्मा पूजा
आज विश्वकर्मा पूजा का नाम सुनते ही मशीन, फैक्ट्री, वर्कशॉप और तकनीकी काम की तस्वीर सामने आती है। इस दिन कई जगह मशीनों, औजारों, वाहनों और काम में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा की जाती है। लेकिन इसका दायरा इससे बड़ा है। कारीगर, मैकेनिक, निर्माण क्षेत्र से जुड़े लोग, इंजीनियर, आर्किटेक्ट, तकनीकी कर्मचारी और विभिन्न प्रकार के व्यवसायी भी इस पर्व को अपने काम और उपकरणों के सम्मान से जोड़ते हैं।
यही वजह है कि विश्वकर्मा पूजा को काम, कौशल, निर्माण और तकनीक से जुड़े लोगों के महत्वपूर्ण पर्व के रूप में भी देखा जाता है।
सितंबर में ही क्यों दिखाई देती है विश्वकर्मा पूजा?
इसका सीधा जवाब है-कन्या संक्रांति। सूर्य जब कन्या राशि में प्रवेश करता है, वह समय आमतौर पर सितंबर में आता है। इसलिए विश्वकर्मा पूजा भी सामान्यतः सितंबर के मध्य के आसपास पड़ती है।
यानी विश्वकर्मा पूजा की तारीख के पीछे किसी एक अंग्रेजी कैलेंडर की तारीख से ज्यादा महत्वपूर्ण है सूर्य की गति और संक्रांति की गणना।
विश्वकर्मा पूजा 2026: एक नजर में
- विश्वकर्मा पूजा: 17 सितंबर 2026
- दिन: गुरुवार
- अवसर: कन्या संक्रांति
- कन्या संक्रांति: 17 सितंबर 2026
- सूर्य का कन्या राशि में प्रवेश: लगभग सुबह 7:58 बजे
- मुख्य पूजा परंपरा: भगवान विश्वकर्मा के साथ औजारों, मशीनों और कार्यस्थल की पूजा
- प्रमुख रूप से जुड़े वर्ग: कारीगर, तकनीकी कर्मचारी, इंजीनियर, मैकेनिक, निर्माण और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़े लोग
तो अगली बार जब कोई पूछे कि “विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को ही क्यों मनाई जाती है?”, तो जवाब सिर्फ यह नहीं है कि यह भगवान विश्वकर्मा की जयंती है। इसके पीछे कन्या संक्रांति और सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश का संबंध भी है। और यही वजह है कि विश्वकर्मा पूजा की तारीख को समझने के लिए अंग्रेजी कैलेंडर से ज्यादा जरूरी है भारतीय सौर गणना और संक्रांति की परंपरा को समझना।
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कंटेंट राइटर एवं रिपोर्टर, खबर मन्त्र। झारखंड के स्थानीय समाचार, महिला विकास, कला और लाइफस्टाइल खबरों की विशेष रिपोर्टिंग।









