Ranchi: ढोल-नगाड़ों और मांदर की थाप के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन का रांची में जोरदार स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर पार्टी के तमाम नेता, पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नितिन नवीन 24 अक्टूबर से रांची में शुरू हो रही दो दिवसीय भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होंगे।
लेकिन सवाल यह है कि आखिर नितिन नवीन का यह दौरा इतना खास क्यों माना जा रहा है? छह महीने के भीतर उनका यह दूसरा झारखंड दौरा है। ऐसे में इस बैठक को सिर्फ संगठनात्मक बैठक के तौर पर देखना सही नहीं होगा। इसके जरिए भाजपा की नजर आने वाले चुनावों की तैयारी, संगठन की मजबूती और राज्य की राजनीति में अपनी पकड़ बढ़ाने पर भी रहेगी। ऐसे में देखा जाए तो नितिन नवीन के इस दौरे की अहमियत क्या है।
पहला बिंदु: 2029 के विधानसभा चुनाव की तैयारी
झारखंड में 2029 के विधानसभा चुनाव में 3 साल है, लेकिन भाजपा ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी है। क्योंकि 2024 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद जिस पार्टी ने हार की समिक्षा नहीं कि, उसने तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी वोटिंग प्रतिशत को बढ़ाना है।
राज्य में संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की होगी। इसके लिए बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता बढ़ाने, जनता के बीच लगातार संपर्क बनाए रखने औऱ संगठनात्मक कमियों को दूर करने पर चर्चा हो सकती है। प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में नेताओं और कार्यकर्ताओं को आने वाले समय के लिए स्पष्ट दिशा देने पर जोर रहने की संभावना है। पार्टी किस तरह अपने जनाधार का विस्तार करेगी और जनता के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करेगी, यह रणनीति के लिहाज से अहम होगा।
दूसरा बिंदु: आदिवासी आरक्षित सीटों पर भाजपा की नजर
झारखंड की राजनीति में आदिवासी वोट बैंक और आदिवासी आरक्षित विधानसभा सीटों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में इन सीटों पर भाजपा को करारी हार मिली है। मौजूदा विधानसभा में भी पार्टी के पास इन सीटों पर केवल एक ही प्रतिनिधित्व है। ऐसे में भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती आदिवासी बहुल इलाकों में अपना जनाधार मजबूत करना होगा। इसके लिए स्थानीय मुद्दों को उठाने, आदिवासी समुदाय के बीच संवाद बढ़ाने और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करने की रणनीति पर जोर दिया जा सकता है।
नितिन नवीन के दौरे को इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि पार्टी आने वाले वर्षों में आदिवासी सीटों पर अपनी स्थिति कैसे मजबूत करेगी। साथ ही विकास योजनाओं और केंद्र की नीति को किस तरह से आदिवासी सीटों की तरफ बढ़ाती है। क्योंकि राज्य के आदिवासी आज भी सीएम हेमंत सोरेन के साथ खड़े नजर आते है। इसके अलावे विपक्ष भी समय-समय पर भाजपा को घेरती नजर आती है। तो ऐसे में भाजपा के लिए यह एक महत्वपूर्ण चुनौती है। जिसकों लेकर आज की बैठक में चर्चा की जा सकती है।
तीसरा बिंदु: जनहित के मुद्दों पर सड़क पर उतरने की तैयारी
भाजपा के लिए सिर्फ चुनावी रणनीति बनाना ही पर्याप्त नहीं है। राज्य में अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ाने के लिए उसे जनता से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाना होगा। ऐसे में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में सरकार को घेरने की रणनीति पर भी चर्चा महत्वपूर्ण होगी। जिसके लिए पार्टी को प्रेस विज्ञप्ति से इतर बेरोजगारी, नियुक्तियों, कानून-व्यवस्था और विकास से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की भूमिका किस तरह मजबूत की जाए, इस पर पार्टी का रुख अहम रहेगा। इसके साथ ही जनहित के सवालों पर आंदोलन, प्रदर्शन और सरकार के खिलाफ विरोध कार्यक्रमों के जरिए जनता के बीच अपनी मौजूदगी बढ़ाने की रणनीति भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
ऐसे में देखा जाए तो, नितिन नवीन का रांची दौरा भाजपा के लिए संगठनात्मक मजबूती, आदिवासी सीटों पर वापसी और 2029 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से अहम है। अब देखना होगा कि दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक से पार्टी को क्या उर्जा मिलती है और बैठक में तय रणनीति को जमीन पर उतारने के लिए भाजपा किस तरह आगे बढ़ती है। यह समय के खेल के साथ समय रहते नजर आने लगेंगी।

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