रांची: झारखंड सरकार ने राजस्व संग्रह की व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक नई पहल की है। गुरुवार को वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधा कृष्ण किशोर की उपस्थिति में वाणिज्य कर विभाग और नए सिस्टम इंटीग्रेटर के बीच CT-MIC परियोजना के तहत इकरारनामा हुआ। इस परियोजना का काम चॉइस कंसल्टेंसी को सौंपा गया है। दी गई जानकारी के अनुसार, कंपनी को छह महीने के भीतर काम पूरा करना है।
इस मौके पर वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के राजस्व संग्रह को बढ़ाने और मौजूदा व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने की जरूरत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए सिस्टम से राजस्व संबंधी सूचनाओं के प्रबंधन में सुधार होगा और सरकार की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।
खनन क्षेत्र से जुड़े राजस्व पर विशेष जोर
वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने झारखंड के खनिज संसाधनों और उनसे मिलने वाले राजस्व का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य की जमीन से बड़ी मात्रा में खनिज निकाले जाते हैं, लेकिन खनन गतिविधियों से होने वाली परेशानियों का सामना स्थानीय लोगों को करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में चलने वाले वाहनों और उनसे संबंधित गतिविधियों की पूरी जानकारी व्यवस्थित तरीके से उपलब्ध नहीं हो पाती है। यदि इन जानकारियों का बेहतर प्रबंधन किया जाए, तो राज्य के राजस्व संग्रह में वृद्धि की संभावनाएं बन सकती हैं।
केंद्रीय अनुदान में कटौती पर जताई चिंता
कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय अनुदान की राशि में लगातार कटौती की जा रही है, जिससे झारखंड को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
उन्होंने मनरेगा योजना का उल्लेख करते हुए केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय हिस्सेदारी का मुद्दा उठाया। साथ ही कहा कि केंद्र की आर्थिक नीतियों का असर राज्य की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है।
MMDR को लेकर भी उठाए सवाल
राधा कृष्ण किशोर ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम यानी MMDR का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे संबंधित प्रावधानों के कारण झारखंड को राजस्व संबंधी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि खनिज संपदा से समृद्ध होने के बावजूद राज्य को अपने संसाधनों का पूरा आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। खनन गतिविधियों की बेहतर निगरानी और संबंधित सूचनाओं को व्यवस्थित करके राजस्व बढ़ाने की दिशा में काम किया जा सकता है।
वित्त मंत्री ने कहा कि वाणिज्य कर विभाग और नए सिस्टम इंटीग्रेटर के बीच हुआ इकरारनामा राजस्व संग्रह की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार को उम्मीद है कि परियोजना के लागू होने से राजस्व प्रबंधन में सुधार होगा।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
विकाश कुमार झारखंड के रांची के रहने वाले और यहीं जन्मे पत्रकार एवं डिजिटल मीडिया प्रोफेशनल हैं। झारखंड में लंबे समय से रहने और काम करने के कारण उन्हें राज्य के गांवों, शहरों, स्थानीय समाज, प्रशासन और जमीनी मुद्दों की गहरी समझ है।
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