Jharkhand: भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल को पत्र लिखकर राज्य सरकार की प्रस्तावित नई उत्पाद (शराब बिक्री) नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं और इस नीति में आदिवासी, दलित, दिव्यांग, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को आरक्षण देने की मांग की है।
मरांडी ने पत्र में लिखा है कि पूर्ववर्ती शराब नीतियाँ न केवल राजस्व हानि का कारण बनीं, बल्कि राज्य के छोटे व्यवसायियों एवं बेरोजगार युवाओं के लिए भी विफल साबित हुईं। उन्होंने आरोप लगाया कि शराब माफिया और दलालों को फायदा पहुंचाने वाली यह व्यवस्था आम जनता के हित में नहीं थी।
उन्होंने राज्यपाल से निम्नलिखित तीन प्रमुख सुझावों पर ध्यान देने की अपील की:
- जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण:
जिस प्रकार केंद्र सरकार पेट्रोल पंप और गैस एजेंसी वितरण में वंचित वर्गों को प्राथमिकता देती है, उसी प्रकार झारखंड सरकार को भी आदिवासी, दलित, दिव्यांग, महिलाओं और पूर्व सैनिकों को शराब दुकान आवंटन में आरक्षण देना चाहिए। - एक व्यक्ति – एक दुकान का प्रावधान:
नई उत्पाद नीति में एक व्यक्ति या प्रतिष्ठान को पूरे राज्य में केवल एक ही शराब दुकान संचालित करने की अनुमति दी जाए। इससे अधिक लोगों को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा। - 75% आरक्षण नीति का विस्तार:
राज्य सरकार द्वारा निजी क्षेत्रों में 75% आरक्षण की नीति को शराब दुकानों के आवंटन में भी लागू किया जाए।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि वर्तमान नीति में एक व्यक्ति को जिला स्तर पर 3 यूनिट (9 दुकानें) और राज्य स्तर पर 36 दुकानें संचालित करने की अनुमति दी गई है, जिससे शराब कारोबार पर कुछ बड़े व्यापारियों का एकाधिकार स्थापित हो जाएगा।
उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि इन सुझावों को मुख्यमंत्री को निर्देशित करें, जिससे नई उत्पाद नीति पारदर्शी, समावेशी और राज्य हित में लाभकारी सिद्ध हो।












