मुख्य बिंदु:
- मरीजों के लिए निर्धारित दवाएं एक्सपायरी डेट से पहले ही फेंकी गईं
- स्वास्थ्य केंद्र अक्सर बंद रहता है, मरीज बेहाल
- ग्रामीणों ने स्वास्थ्य कर्मियों पर लापरवाही और मनमानी का आरोप लगाया
- स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों की खुलेआम अवहेलना
स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही: ग्रामीणों की जान से खिलवाड़
रूपडीह आयुष्मान आरोग्य केंद्र, जो आसपास के दर्जनों गांवों के लिए एकमात्र प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र है, इन दिनों गंभीर लापरवाही और अव्यवस्था के कारण सुर्खियों में है। मरीजों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं, और स्वास्थ्यकर्मियों की अनियमितता से ग्रामीणों का भरोसा डगमगाने लगा है।
दवाएं फेंकी गईं, मरीजों को नहीं दी गईं
केंद्र के पीछे भारी मात्रा में फेरस सल्फेट और फोलिक एसिड टैबलेट (Ferrous Sulphate & Folic Acid Tablets) फेंके हुए पाए गए, जिनकी एक्सपायरी डेट सितंबर 2025 है। यह टैबलेट शरीर में आयरन और खून की कमी पूरी करने के लिए दी जाती है, खासकर महिलाओं और बच्चों को। इन दवाओं को फेंकना न सिर्फ संसाधनों की बर्बादी है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य लापरवाही भी है।
स्वास्थ्यकर्मी गायब, केंद्र बंद
सोमवार को सुबह 11:45 बजे जब संवाददाता केंद्र पहुंचा, तो दरवाजे बंद मिले। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि यह केंद्र कभी-कभार ही खुलता है। केंद्र में एएनएम शकुंतला शर्मा और सीएचओ हेमेंद्र कुमार तैनात हैं, लेकिन उनकी नियमित उपस्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री के आदेशों की अवहेलना
स्वास्थ्य मंत्री ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों को नियमित रूप से संचालन और मरीजों को प्राथमिकता देने का स्पष्ट आदेश दिया था, लेकिन रूपडीह केंद्र में हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं।
ग्रामीणों की मांग: जांच हो, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि मामले की जांच कराई जाए और दोषी कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही ना हो और मरीजों का भरोसा बहाल किया जा सके।













