Jharkhand News: एक ओर जहां स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी लगातार RIMS की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के दावे करते नहीं थकते, वहीं दूसरी ओर RIMS की लापहरवाही से दो भाइयों की जान पर बन आई. लेकिन, समय रहते किसी तरह दोनों की जान बच गई. बता दें, इस मामले ने एक बार फिर स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए है.
दरअसल, राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS), रांची से एक बार फिर लापरवाही का मामला सामने आया है. जहां, मंगलवार को RIMS की पुरानी बिल्डिंग की एक लिफ्ट में दो मासूम बच्चे करीब एक घंटे तक फंसे रहे. इन बच्चों में एक मरीज था और दूसरा उसका छोटा भाई. दोनों बच्चा वार्ड की ओर जा रहे थे, लेकिन अचानक लिफ्ट बीच रास्ते में फंस गई.
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सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मौके पर कोई लिफ्ट मैन या टेक्नीशियन मौजूद नहीं था. जब लोगों ने इमरजेंसी नंबर और लिफ्ट ऑपरेटर को बार-बार फोन किया, तब कहीं जाकर मदद पहुंची. लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी — बच्चे घबराए गए थे.
करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद रेस्क्यू टीम ने दरवाजों के बीच डंडा डालकर किसी तरह उन्हें बाहर निकाला.
अगर सेंसर काम करता, तो हादसा टल सकता था
वहां मौजूद लोगों ने बताया कि बच्चों में से एक का शरीर लिफ्ट के बाहर था और उसी दौरान दरवाजा अचानक बंद हो गया. अगर लिफ्ट के सेंसर ठीक ढंग से काम कर रहे होते, तो यह स्थिति कभी नहीं आती.
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RIMS प्रबंधन पर उठे सवाल, मेंटनेंस कंपनी को नोटिस
घटना के बाद RIMS प्रबंधन ने मेंटनेंस करनेवाली कंपनी को नोटिस जारी किया है और सभी लिफ्टों की जांच व मरम्मत के निर्देश दिये हैं. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या कार्रवाई केवल नोटिस तक ही सीमित रहेगी?
मरीजों के लिए जर्जर, अधिकारियों के लिए चकाचक!
यह कोई पहली घटना नहीं है. RIMS की पुरानी इमारत में दर्जनों लिफ्ट हैं, जिनमें से ज़्यादातर खराब या जर्जर हालत में हैं. एमसीआई की टीम भी पहले लिफ्ट में फंस चुकी है. सिर्फ प्रबंधन और डॉक्टरों के लिए आरक्षित लिफ्टें ही ठीक-ठाक हालत में हैं, बाकी मरीजों के भरोसे भगवान हैं.
बच्चों की जान बच गई, ये राहत की बात है. लेकिन क्या अगली बार भी किस्मत साथ देगी? RIMS जैसे बड़े संस्थान में ऐसी लापरवाही कहीं न कहीं पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है. समय रहते यदि सभी लिफ्टों की मरम्मत और मॉनिटरिंग नहीं की गई, तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है.













