Jharkhand: ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू) के बृहत झारखंड के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष ललित कुमार महतो ने एक प्रेस बयान जारी करते हुए आजसू पार्टी की वैधता और उसकी स्थापना तिथि पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आजसू की स्थापना 22 जून को नहीं हुई थी, इसलिए आजसू पार्टी स्थापना दिवस नहीं बल्कि बलिदान दिवस मनाती है।
आजसू पार्टी की शुरुआत नहीं, बलिदान का प्रतीक है 22 जून
ललित महतो के अनुसार, ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (AJSU) की वास्तविक राजनीतिक इकाई कभी झारखंड पीपुल्स पार्टी (JPP) थी। लेकिन झारखंड राज्य निर्माण के बाद, कुछ लोगों ने साज़िश के तहत AJSU का नाम राजनीतिक दल के रूप में रजिस्टर करवा लिया। वर्ष 2007 में वरिष्ठ नेताओं की शिकायत के बाद इस राजनीतिक इकाई का नाम बदलकर आजसू पार्टी कर दिया गया।
वर्तमान नेतृत्व पर गंभीर आरोप: ‘माफियाओं का अड्डा बन गया है आजसू पार्टी’
पूर्व अध्यक्ष ललित महतो ने आजसू पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि आज की पार्टी में अधिकांश नेता क्रेशर, टिंबर, जमीन, कोयला, बालू और शिक्षा माफिया हैं। इसके अलावा कई निजी स्कूलों, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और होटलों के मालिक भी इसमें शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि यह नेतृत्व झारखंड के युवाओं को गुमराह कर स्वार्थ सिद्धि में लगे हैं।
चुनाव आयोग से होगी शिकायत
ललित महतो ने बताया कि जल्द ही उनके नेतृत्व में युवाओं का एक प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर मुख्य चुनाव आयुक्त से मुलाकात करेगा। उनका उद्देश्य आजसू नाम के अनधिकृत इस्तेमाल को रोकना है।
जनवरी 2026 में होगा आजसू का विधिवत पुनर्गठन
उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जनवरी 2026 में एक अधिवेशन आयोजित कर, आज के छात्र और नवजवानों को आजसू की बागडोर सौंपी जाएगी, ताकि वे झारखंड राज्य निर्माण के उद्देश्यों को फिर से जीवित कर सकें।
‘झारखंड के संघर्षशील कार्यकर्ता ही मेरे साथ हैं’
ललित महतो ने कहा, “मैं आज भी उन्हीं लोगों के साथ हूं जो कभी AJSU छोड़कर किसी अन्य संगठन या राजनीतिक दल में नहीं गए। जिनका जीवन झारखंड के संघर्ष में बीता है, वे मेरे साथ हैं और मैं उनके साथ।”











