रांची, जून 2025: झारखंड के वनों की मौसमी निगरानी अब और अधिक वैज्ञानिक और सटीक होगी. बीआईटी मेसरा, नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (NRSC, ISRO) हैदराबाद और झारखंड वन विभाग के बीच मंगलवार को एक त्रिपक्षीय समझौता (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. इस समझौते के तहत राज्य में फॉरेस्ट फेनोलॉजी मॉनिटरिंग प्रोग्राम की शुरुआत की जाएगी, जो सैटेलाइट डेटा और फेनोकैम तकनीक के समन्वय से वन परिवर्तनों की निगरानी करेगा.
क्या है फेनोकैम और इसका महत्व?
फेनोकैम एक स्थायी डिजिटल कैमरा प्रणाली है, जिसे जंगलों में स्थापित किया जाता है. यह पेड़ों के पत्तों के निकलने, फूलने और झड़ने जैसे मौसमी बदलावों की लगातार तस्वीरें लेता है. जब इसे सैटेलाइट डेटा से जोड़ा जाता है, तो यह जलवायु परिवर्तन की निगरानी, कार्बन उत्सर्जन विश्लेषण और बायोडायवर्सिटी संरक्षण जैसे क्षेत्रों में अत्यधिक उपयोगी डेटा प्रदान करता है.
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परियोजना की वैज्ञानिक दृष्टि
परियोजना का तकनीकी खाका एनआरएससी कोलकाता के वैज्ञानिक नीरज प्रियदर्शी ने प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि यह प्रणाली झारखंड के वनों में मौसमी बदलावों की सटीक और रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव बनाएगी। इसरो मुख्यालय बेंगलुरु के वैज्ञानिक गिरीश पज्जार ने इसके वैज्ञानिक उपयोग और दीर्घकालिक प्रभावों को रेखांकित किया.
समझौते में कौन-कौन रहे शामिल?
बीआईटी मेसरा परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति रही:
• इंद्रनील मन्ना, कुलपति, बीआईटी मेसरा
• प्रकाश चौहान, निदेशक, एनआरएससी, हैदराबाद
• परितोष उपाध्याय, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), झारखंड
• एस.के. श्रीवास्तव, मुख्य महाप्रबंधक, क्षेत्रीय रिमोट सेंसिंग केंद्र
• सरज सिंह, डीएफओ, हजारीबाग
• सी. जेगनाथन, सरला बिरला विश्वविद्यालय
• रवि रंजन, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, झारखंड
• एस. आर. नटेश, मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), झारखंड
• अन्य वैज्ञानिक, अधिकारी, डीन और संकाय सदस्य
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झारखंड के वन प्रबंधन को मिलेगी नई दिशा
यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण और स्थायी विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के प्रभावी उपयोग का एक अनुकरणीय उदाहरण है. झारखंड जैसे जैव-विविधता से भरपूर राज्य में यह पहल वन प्रबंधन, जलवायु अध्ययन, बायोडायवर्सिटी संरक्षण और नीति-निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सिद्ध होगी.












