“ताजमहल बेच चुका है… संसद भवन तक बेच दिया… और कोई पकड़ भी नहीं पाया!
ये कोई फिल्मी डायलॉग नहीं है, बल्कि भारत के सबसे कुख्यात ठग – नटवरलाल की असल कहानी है. एक ऐसा शातिर इंसान, जिसकी चालाकी और होशियारी ने सिस्टम को बार-बार मात दी… और उसने ऐसे-ऐसे कारनामे किए, जिन पर आज भी लोग यकीन नहीं कर पाते.
कौन था नटवरलाल?
मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव, उर्फ़ नटवरलाल, बिहार के सिवान जिले का रहने वाला था. पढ़ाई में होशियार, और चालबाजियों में उस्ताद. पहले वकील बनने की तैयारी की, फिर चार्टर्ड अकाउंटेंट बन गया — और यहीं से शुरू हुआ उसका असली खेल.
ताजमहल, संसद, यहां तक कि राष्ट्रपति भवन तक बेचा!
आपने सुना होगा कि कोई ज़मीन बेच देता है, लेकिन नटवरलाल ने तो ऐतिहासिक इमारतें बेच डालीं — वो भी विदेशी पर्यटकों को, नकली दस्तावेज़ों और सरकारी मुहरों के साथ! कहा जाता है कि उसने कई बार ताजमहल, लाल किला, राष्ट्रपति भवन, यहां तक कि संसद भवन तक को अमीर विदेशियों को “बेच” दिया. नकली साइन, नकली रजिस्ट्रेशन पेपर, नकली स्टाम्प, सब कुछ असली जैसा होता था.
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पैसे भी चुराए, वो भी सबसे भरोसेमंद सिस्टम से
नटवरलाल ने भारतीय बैंकों से करोड़ों रुपये निकाल लिए— वो भी महात्मा गांधी के नकली हस्ताक्षर दिखाकर. बैंक अधिकारी भी उसकी होशियारी के सामने धोखा खा जाते थे.
100 से ज्यादा केस… फिर भी नहीं पकड़ पाई पुलिस
उसके खिलाफ 100 से ज्यादा केस दर्ज थे, लेकिन क्या मजाल कि उसे कोई ज़्यादा दिनों तक जेल में रख पाए. वो 9 बार जेल से फरार हुआ. आखिरी बार 1996 में उसे पकड़कर दिल्ली लाया गया, और वहां से भी वह चमत्कारी ढंग से लापता हो गया. कई लोगों का मानना है कि नटवरलाल की मौत 2009 में 97 साल की उम्र में हो गई, लेकिन कोई पक्की पुष्टि आज तक नहीं हो सकी.
आखिर क्यों लोग नटवरलाल को हीरो मानते हैं?
उसने कभी किसी गरीब को नहीं ठगा, ज्यादातर सिस्टम और रसूखदार लोगों को निशाना बनाया. लोग उसे भारतीय रॉबिनहुड भी कहते है.
नटवरलाल सिर्फ एक नाम नहीं, धोखाधड़ी की दुनिया का आइकन बन चुका है. उसकी कहानी आज भी लोगों को रोमांचित करती है — और सिखाती है कि दिमाग अगर तेज हो, तो सिस्टम तक मात खा सकता है.












