Khabar Mantra Desk : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच किसी प्रकार का विवाद नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ सरकार के फैसले तय नहीं करता, बल्कि सिर्फ सलाह देता है।
“संघ सरकार के फैसले नहीं करता तय” – मोहन भागवत
दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित RSS के 100 साल पूरे होने पर तीन दिवसीय संवाद कार्यक्रम के अंतिम दिन मोहन भागवत ने कहा:
- “यह कहना गलत है कि सरकार में सब कुछ संघ तय करता है। हम सलाह दे सकते हैं, लेकिन निर्णय सरकार ही लेती है।”
- उन्होंने जोड़ा, “अगर हम तय करते तो इतना समय नहीं लगता।”
पीएम-सीएम और नेताओं की छवि पर राय
हाल ही में चर्चा में आए उस नए बिल पर भी भागवत ने अपनी राय रखी, जिसके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री जेल जाने पर पद से हट सकते हैं।
- उन्होंने कहा, “नेतृत्व और नेताओं की छवि साफ होना जरूरी है। इस पर कानून बने या नहीं, यह संसद तय करेगी।”
नई शिक्षा नीति और तकनीक पर विचार
मोहन भागवत ने कहा कि भारत में अंग्रेजों ने ऐसी शिक्षा लाई थी जिससे लोग उनके गुलाम बने रहें।
- नई शिक्षा नीति में पंचकोशीय शिक्षा (कला, खेल, योग आदि) को शामिल किया गया है।
- गुरुकुल शिक्षा मॉडल को अपनाने की बात कही और उदाहरण दिया कि फिनलैंड ने भी गुरुकुल मॉडल अपनाया है।
- उन्होंने स्पष्ट किया, “अंग्रेजी भाषा सीखना गलत नहीं है, लेकिन इसके लिए हिंदी और संस्कृत को नहीं छोड़ना चाहिए।”
अन्य दलों और संबंधों पर बयान
- भागवत ने कहा कि संघ के सभी सरकारों से अच्छे संबंध रहे हैं, सिर्फ भाजपा से ही नहीं।
- प्रणब मुखर्जी का जिक्र करते हुए बोले कि जब वे संघ मंच पर आए तो उनकी गलतफहमियां दूर हुईं।
- “हम मदद उन्हीं को देते हैं जो मदद चाहते हैं।”
डेमोग्राफी और घुसपैठ पर चिंता
भागवत ने जनसंख्या और घुसपैठ पर भी चिंता जताई।
- “डेमोग्राफी बदलती है तो देश का बंटवारा होता है। धर्म बदलना किसी लोभ-लालच से नहीं होना चाहिए।”
- उन्होंने कहा कि घुसपैठ रोकने के लिए सरकार काम कर रही है।
- “हमारे देश में मुसलमान हैं, उन्हें रोजगार देना चाहिए। लेकिन घुसपैठियों को रोजगार क्यों देना?”













