Jharkhand: झारखंड के पूर्व मंत्री योगेंद्र साव इन दिनों दोहरी कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में हैं। एक तरफ हजारीबाग जिले में उनके आवास पर प्रशासन ने बुलडोजर चलाया, तो दूसरी ओर Congress पार्टी ने उन्हें सीधे तीन साल के लिए निष्कासित कर दिया। इन दोनों घटनाओं ने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
हजारीबाग के केरेडारी प्रखंड अंतर्गत जोरदाग में स्थित उनका आवास चट्टी बरियातु कोल परियोजना के विस्तार के तहत ध्वस्त किया गया। प्रशासन का कहना है कि यह जमीन पहले से परियोजना क्षेत्र में शामिल थी और सभी आवश्यक कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद ही यह कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा, वहीं स्थानीय लोगों की भीड़ जुटने से कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण भी हो गया, हालांकि स्थिति नियंत्रण में रही।
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, घर और अन्य संरचनाओं का मुआवजा पहले ही सरकारी कोष में जमा कराया जा चुका था। उनका दावा है कि पूरी प्रक्रिया नियमों के तहत पूरी की गई है।
वहीं, इस कार्रवाई पर विरोध भी सामने आया है। पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने आरोप लगाया कि घर तोड़ने से पहले किसी तरह की सूचना नहीं दी गई और कंपनी मनमाने तरीके से काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले को लेकर वे दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाएंगी।
इसी बीच, झारखंड प्रदेश Congress कमेटी की अनुशासन समिति ने भी योगेंद्र साव के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए उन्हें पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से तीन वर्षों के लिए निष्कासित कर दिया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि योगेंद्र साव लगातार सोशल मीडिया और फेसबुक लाइव के माध्यम से गठबंधन सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां कर रहे थे, जो पार्टी अनुशासन के विरुद्ध है।
हालांकि, इस निर्णय को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है, क्योंकि आमतौर पर ऐसे मामलों में पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाता है, जबकि इस मामले में सीधे निष्कासन की कार्रवाई की गई है।
कुल मिलाकर, योगेंद्र साव के लिए यह घटनाक्रम एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है—जहां एक ओर उनका घर प्रशासनिक कार्रवाई में ध्वस्त हुआ, वहीं दूसरी ओर पार्टी ने भी उनसे दूरी बना ली। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और कानूनी रूप से और तूल पकड़ सकता है।










