Jharkhand News: चट्टीबारियातु कोल परियोजना के विस्तार के तहत एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा अधिग्रहित क्षेत्र झुमरी टांड में बंद पड़े पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के फ्रैकली ईंट चिमनी और चारदीवारी को प्रशासनिक निगरानी में ढहा दिया गया. इस कार्रवाई के दौरान मजिस्ट्रेट, सीओ रामरतन वर्णवाल, कनिष्ठ अभियंता अंकित पांडेय और एनटीपीसी कर्मी मौजूद थे.
कार्रवाई की सूचना मिलते ही योगेंद्र साव अपने सरकारी और निजी अंगरक्षकों व समर्थकों के साथ स्थल पर पहुंचे और हंगामा शुरू कर दिया. उन्होंने कोल परियोजना की ट्रांसपोर्टिंग को रुकवा दिया और एक हाईवा चालक के साथ मारपीट कर जबरन उठा ले गए, जिसे बाद में ओपी प्रभारी विक्की ठाकुर ने छुड़ाया.
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इतना ही नहीं, साव ने अपने समर्थकों के साथ सीबी माइंस में एक पोकलेन चालक को भी बंधक बना लिया और झुमरी टांड स्थित अपने आवास पर कैद कर लिया. जब एमडीओ कंपनी के असिस्टेंट मैनेजर अनुराग गुप्ता और सुरक्षा प्रभारी रिटायर्ड डीएसपी अवधेश सिंह चालक को छुड़ाने पहुंचे, तो उनके साथ भी मारपीट की गई और उन्हें भी बंधक बनाकर 9 घंटे तक रखा गया.
स्थिति तब काबू में आई जब केरेडारी पुलिस ने हस्तक्षेप कर तीनों को रात 3 बजे छुड़ाया. घायल पोकलेन चालक की हालत गंभीर बताई जा रही है.
क्या है जमीन का विवाद?
चट्टीबारियातु कोल परियोजना के तहत प्लॉट संख्या 13, खाता संख्या 190 की एक एकड़ ज़मीन अधिग्रहीत की गई है, जिसका जमाबंदी राजदीप साव के नाम पर है. पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने जमीन अपने नाम पर कराने का दावा किया लेकिन दाखिल-खारिज अब तक नहीं हुआ है. उन्होंने इस ज़मीन पर चिमनी और चारदीवारी बना कर कब्ज़ा कर रखा था. एनटीपीसी के अनुसार, संरचनाएं बिल्डिंग डिवीजन से मापी कराई गई थीं और मुआवजा निर्धारित कर ट्रिब्यूनल में जमा करा दिया गया था, लेकिन साव ज़मीन और संरचना का मुआवजा एक साथ मांग रहे थे.
एनटीपीसी और एमडीओ कंपनी ने योगेंद्र साव और उनके समर्थकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.













