बिरनी, गिरिडीह : गिरिडीह जिले के बिरनी प्रखंड स्थित चौंगाखार गांव में जमीन विवाद को लेकर तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। खाता संख्या 63 और प्लॉट संख्या 113 की कुल 42 एकड़ भूमि में से मध्यवर्ती 10 एकड़ 70 डिसमिल भूमि पर वर्षों से ग्रामीणों के मकान और सरकारी योजनाओं के तहत बने आवास मौजूद हैं। यह जमीन विधिवत जमाबंदी में दर्ज भी है।
हाल ही में ग्रामीण घुटर महतो द्वारा आरंभ किए गए नवनिर्माण कार्य को हल्का कर्मचारी द्वारा रोक दिए जाने के बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कर्मचारी किसी “प्रभावशाली व्यक्ति” के दबाव में आकर कार्य में बाधा पहुंचा रहे हैं।
भाकपा माले की टीम ने किया गांव का दौरा
29 मई को इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए भाकपा माले (CPI-ML) की एक टीम ने चौंगाखार गांव का दौरा किया। टीम ने मौके का मुआयना कर ग्रामीणों से बात की और प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित न्याय की मांग की।
भाकपा माले ने चेतावनी दी कि यदि जल्द इस मामले का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन छेड़ा जाएगा।
टीम में भाकपा माले बिरनी प्रखंड सचिव शेखर सुमन, इजराइल अंसारी, हिरामणी यादव, भीखन राय समेत कई अन्य कार्यकर्ता शामिल थे।
भाकपा माले की प्रमुख मांगें:
- जमीन विवाद की निष्पक्ष जांच
- निर्माण कार्य में बाधा डालने वाले कर्मचारी की भूमिका की जांच
- ग्रामीणों के अधिकारों की सुरक्षा
- प्रशासन द्वारा जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी
चौंगाखार जमीन विवाद गिरिडीह जिले में एक और सामाजिक और प्रशासनिक चुनौती बनता जा रहा है। भाकपा माले के हस्तक्षेप से यह मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेता नजर आ रहा है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में कितना संवेदनशील और सक्रिय रुख अपनाता है।












