Jharkhand: भारत निर्वाचन आयोग द्वारा बिहार से शुरू किए गए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को अब राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की योजना बनाई जा रही है। इस कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में प्रतिक्रियाओं का दौर जारी है।
सीपीआई(एम) ने निर्वाचन आयोग के इस निर्णय को लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए 8 अगस्त को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। पार्टी ने झारखंड में भी इस प्रदर्शन को सफल बनाने की अपील की है।
सीपीआई(एम) का आरोप है कि मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया में आयोग नागरिकता सत्यापन जैसे संवैधानिक दायरे से बाहर के अधिकार अपने हाथ में लेने की कोशिश कर रहा है। पार्टी का दावा है कि इस प्रक्रिया के जरिए अल्पसंख्यकों और चुनिंदा समुदायों को मताधिकार से वंचित करने की कोशिश की जा रही है।
पार्टी नेताओं ने यह भी कहा कि यह पहल एनआरसी जैसी प्रक्रिया को एक बार फिर “पिछले दरवाजे से” लागू करने की कोशिश है, जिसे देश ने पहले ही बड़े पैमाने पर नकारा था।
गौरतलब है कि तेलुगु देशम पार्टी (TDP) जैसे भाजपा के कुछ सहयोगी दलों ने भी SIR को लेकर अपनी आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं।
निर्वाचन आयोग पर निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल
सीपीआई(एम) का कहना है कि निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि यह प्रक्रिया आरएसएस/संघ परिवार के एजेंडे को समर्थन देने की दिशा में दिख रही है। पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची पुनरीक्षण को बहाना बनाकर देशभर में लोकतांत्रिक अधिकारों को सीमित किया जा रहा है।
झारखंड में भी प्रदर्शन की तैयारी
सीपीआई(एम) ने 8 अगस्त को होने वाले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन को झारखंड में भी सफल बनाने के लिए कार्यकर्ताओं से सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। पार्टी नेताओं ने आम नागरिकों से इस प्रक्रिया के प्रभाव को समझने और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए आवाज उठाने की अपील की है।












