Ranchi में Private Schools की बढ़ती मनमानी फीस और अतिरिक्त शुल्क वसूली के खिलाफ अब प्रशासन सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रहा है। हाल ही में रांची उपायुक्त और निजी स्कूल प्रबंधन के बीच हुई संयुक्त बैठक के बाद अभिभावकों में न्याय मिलने की नई उम्मीद जगी है।
बैठक के दौरान स्कूलों द्वारा हर साल ली जाने वाली री-एडमिशन फीस, एनुअल चार्ज, डेवलपमेंट फंड, बिल्डिंग फंड और अन्य मदों में वसूले जा रहे भारी शुल्क पर गंभीर चर्चा हुई। प्रशासन ने इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने का भरोसा दिया है।
अभिभावकों की एक बड़ी समस्या यह भी सामने आई कि कई स्कूल प्रबंधन उन्हें निर्धारित दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए बाध्य करते हैं, जिससे आर्थिक बोझ और बढ़ जाता है।
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि उपायुक्त की पहल से अभिभावकों का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि झारखंड शिक्षा न्यायाधिकरण (संशोधन) अधिनियम, 2017 को सही तरीके से लागू किया गया, तो स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी और अभिभावकों को राहत मिलेगी।
प्रमुख मांगें
- सभी निजी स्कूलों में फीस निर्धारण समिति का गठन अनिवार्य हो
- किसी भी फीस वृद्धि से पहले अभिभावकों की सहमति जरूरी हो
- किताबों की सूची स्कूल वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाए
- अभिभावकों को कहीं से भी किताब खरीदने की स्वतंत्रता मिले
- नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई हो
झारखंड पेरेंट्स एसोसिएशन का कहना है कि अगर प्रशासन ठोस कदम उठाता है, तो इससे न केवल अभिभावकों को राहत मिलेगी बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।












