Jharkhand: झारखंड में नीली क्रांति को साकार करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मत्स्य विभाग की अहम समीक्षा बैठक में अधिकारियों को कई निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य के हर जिले में फीड मिल निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जाए और पहले से संचालित फीड मिल को अपग्रेड करने के लिए एक कमिटी बनाई जाए।
राजधानी रांची के पशुपालन भवन में आयोजित इस बैठक में विभागीय अधिकारियों से लेकर राज्य के सभी जिला मत्स्य पदाधिकारी शामिल हुए। मंत्री ने बैठक के दौरान कहा कि राज्य में मत्स्य बीज और फीड उत्पादन को लेकर लंबी योजना बनाई गई है ताकि स्थानीय मत्स्यपालकों को गुणवत्तापूर्ण संसाधन उपलब्ध कराया जा सके।
प्रमुख निर्णय और निर्देश:
- हर जिले में फीड मिल निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा।
- पहले से संचालित 6 फीड मिल की समीक्षा के आधार पर उन्हें अपग्रेड करने के लिए एक कमिटी बनेगी।
- फीड की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए हर तीन माह में फीड की जांच कराई जाएगी।
- प्रमंडलीय स्तर पर प्रभारी अधिकारी हर महीने 2 से 3 जिलों का दौरा करेंगे।
- जिला स्तर पर मिट्टी और गाद से भरे तालाबों की सूची बनाकर उनका जीर्णोद्धार किया जाएगा।
- सरकारी फिश फॉर्म के तालाबों की वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर भविष्य की योजना बनाई जाएगी।
- योजनाओं के कार्यान्वयन में स्थानीय विधायकों और मुखिया से परामर्श आवश्यक किया गया है।
- हर बार अलग लाभुकों को योजना का लाभ देने का निर्देश दिया गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग लाभान्वित हो सकें।
- अधिकारियों को कलस्टर बनाकर काम करने की सलाह भी दी गई है।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि, “ऐसा काम करें कि लोग आपका नाम लें और आपके काम को याद रखें।” इस बैठक में मत्स्य निदेशक एच एन द्विवेदी, विशेष सचिव प्रदीप हजारी, उप निदेशक, प्रमंडलीय प्रभारी सहित सभी जिला अधिकारी उपस्थित थे।
मत्स्य पालन को लेकर झारखंड सरकार का यह कदम न सिर्फ स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाएगा, बल्कि राज्य की आर्थिक स्थिति को भी सुदृढ़ करेगा। फीड मिल और बीज उत्पादन के क्षेत्र में की जा रही यह पहल आने वाले समय में झारखंड को नीली क्रांति के मानचित्र पर स्थापित कर सकती है।












