Jharkhand News: राज्य सरकार द्वारा पेसा कानून (PESA Act) के अनुपालन में बरती गई कोताही को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने आदिवासी बुद्धिजीवी मंच द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
क्या है मामला?
याचिकाकर्ता आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने ग्रामसभा की अनुमति और पेसा कानून के तहत नियमावली बनाए बिना ही बालू घाटों की नीलामी शुरू कर दी है, जो कि पूर्व में हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का उल्लंघन है।
हाईकोर्ट पहले ही सरकार को निर्देश दे चुका था कि पेसा कानून के अनुरूप नियमावली तैयार की जाए। लेकिन अदालत द्वारा तय की गई समयसीमा बीत जाने के बावजूद सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया। इसके चलते याचिकाकर्ता ने कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की।
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कोर्ट का फैसला
मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए निर्देश दिया कि:
- अगली सुनवाई तक बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया पर रोक लगाई जाती है।
- सरकार को दो सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करना होगा।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की रक्षा से जुड़ा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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क्या है पेसा कानून?
पेसा (PESA – Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996) कानून अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभाओं को विशेष अधिकार देता है, जिसमें खनिज संपत्तियों के उपयोग, जल-जंगल-जमीन पर नियंत्रण और संसाधनों के दोहन को लेकर ग्रामसभा की सहमति अनिवार्य होती है।
न्यायपालिका का सख्त संदेश
हाईकोर्ट के इस फैसले को आदिवासी हितों की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह निर्णय राज्य सरकार के रवैये पर सवाल खड़े करता है और साफ संदेश देता है कि संविधान प्रदत्त अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती।












