पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को देखते हुए आज शाम 7 बजे भारत सरकार की सबसे अहम सुरक्षा बैठक—कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS)—होने जा रही है। इस बैठक में मौजूदा हालात और उनके भारत पर पड़ने वाले असर को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी को ईरान में अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमले के बाद स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई है। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई बड़े नेताओं की मौत की खबर आई, जिसके बाद तेहरान की प्रतिक्रिया ने तनाव को और बढ़ा दिया।
इससे पहले भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मुद्दे पर एक CCS बैठक की अध्यक्षता कर चुके हैं। उस बैठक में कैबिनेट सचिव ने वैश्विक हालात और भारत सरकार की तैयारियों पर विस्तार से जानकारी दी थी।
आज की बैठक में खासतौर पर यह देखा जाएगा कि इस संघर्ष का असर किन-किन क्षेत्रों पर पड़ सकता है। इनमें कृषि, खाद्य सुरक्षा, उर्वरकों की उपलब्धता, पेट्रोलियम और ऊर्जा, बिजली उत्पादन, MSME सेक्टर, निर्यात, शिपिंग और सप्लाई चेन, साथ ही वित्त और व्यापार शामिल हैं।
सरकार आम लोगों पर पड़ने वाले असर को लेकर भी सतर्क है। खाद्य पदार्थों, ईंधन और ऊर्जा की उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए शॉर्ट टर्म से लेकर लॉन्ग टर्म तक की रणनीति तैयार की जा रही है।
खासकर किसानों को ध्यान में रखते हुए खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता की समीक्षा की गई है। सरकार का कहना है कि अभी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
बिजली को लेकर भी चिंता की बात नहीं बताई गई है। अधिकारियों के अनुसार, देश के सभी पावर प्लांट्स में पर्याप्त कोयला स्टॉक मौजूद है, जिससे किसी बड़े बिजली संकट की संभावना नहीं है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहा यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अल्पकालिक, मध्यम और दीर्घकालिक असर डाल सकता है। भारत भी इससे पूरी तरह अछूता नहीं रहेगा, इसलिए सरकार लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है।













