KhabarMantra: झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और क्षेत्रीय भाषाओं को बढ़ावा देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए, राज्य के फिल्मकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने सरकार के समक्ष 18 सूत्रीय मांगपत्र प्रस्तुत किया है। इस मांगपत्र में झारखंडी भाषाओं में बनी फिल्मों को प्राथमिकता देने, स्थानीय कलाकारों के सामाजिक-सुरक्षा प्रावधानों को मजबूत करने और सांस्कृतिक गतिविधियों को संस्थागत रूप देने जैसी अनेक महत्वपूर्ण मांगें शामिल हैं।
कलाकारों का कहना है कि यदि इन मांगों को स्वीकार किया जाए, तो राज्य की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नई पहचान मिलेगी।
प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- राज्य के सभी सिनेमाघरों में प्राइम टाइम पर झारखंडी TAL (Theatrical Art Language) भाषाओं की फिल्मों का एक शो अनिवार्य किया जाए।
- झारखंडी फिल्मों को 100% टैक्स छूट देने के लिए फिल्म नीति में टैक्स फ्री सुविधा को प्रभावी रूप से लागू किया जाए।
- जिलों के भवनों, ब्लॉक और पंचायत हॉल में फिल्मों की स्क्रीनिंग की अनुमति दी जाए।
- झारखंडी फीचर, शॉर्ट और डॉक्यूमेंटरी फिल्मों के लिए विशेष सब्सिडी और डायरेक्ट फंडिंग की व्यवस्था हो।
- झारखंड फिल्म विकास निगम (JFDCL) को IPRD विभाग से निकालकर कल्याण विभाग के अंतर्गत लाया जाए।
- झारखंडी कलाकारों का समग्र डाटाबेस तैयार कर उन्हें पहचान पत्र जारी किया जाए।
- राजधानी में एक भव्य कला केंद्र का निर्माण हो, जहां निशुल्क सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें।
- प्रत्येक शनिवार को ‘शनि परब’ के नाम से सांस्कृतिक कार्यक्रम की नियमित श्रृंखला चलाई जाए।
- कलाकारों के लिए बीमा और पेंशन योजना शुरू की जाए।
- कलाकारों के नेटवर्क और सहयोग के लिए ‘आर्टिस्ट क्लब’ की स्थापना की जाए।
- फिल्म नीति में झारखंडी प्रतिनिधियों को 80% तक प्रतिनिधित्व दिया जाए।
इन सभी प्रस्तावों का उद्देश्य झारखंडी भाषाओं, परंपराओं और कलाकारों को सशक्त बनाना और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को मजबूती प्रदान करना है।












