Ayatollah Ali Khamenei Mashhad: मध्य-पूर्व (Middle East) में जारी भीषण तनाव के बीच ईरान से एक युग के अंत की खबर आई है। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई 86 वर्ष की आयु में यूएस-इजरायल जंग में मारे गए। उनके पार्थिव शरीर को ईरान के सबसे पवित्र शहरों में से एक, मशहद में दफनाने की तैयारी चल रही है।
Ayatollah Ali Khamenei Mashhad: इमाम रज़ा दरगाह में दी जाएगी विदाई
फ्रांसीसी समाचार एजेंसी (AFP) और ईरान की ‘फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी’ के अनुसार, खामेनेई को उनके जन्मस्थान मशहद में दफनाया जाएगा। यह वही स्थान है जहाँ उनके पिता को इमाम रज़ा दरगाह के भीतर दफनाया गया था। मशहद शिया इस्लाम का एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु पहुँचते हैं।
आज रात 10 बजे खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, तेहरान की इमाम खुमैनी मस्जिद में 3 दिनों का विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। (IRGC) ने अपने टेलीग्राम अकाउंट पर कहा कि तेहरान में एक “बड़ी विदाई सेरेमनी” होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी समय के अनुसार आज रात 10 बजे खामेनेई के अंतिम संस्कार की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। खामेनेई की मौत की पहली आधिकारिक जानकारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर दी थी। बाद में ईरानी शासन ने भी इसकी पुष्टि की।
36 साल का शासन और अटूट पकड़
खामेनेई 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान के दूसरे सुप्रीम लीडर थे। उनका कार्यकाल सबसे लंबा कार्यकाल था, उन्होंने 36 वर्षों तक ईरान का नेतृत्व किया। सर्वोच्च शक्ति: रक्षा, अर्थव्यवस्था और शिक्षा जैसे सभी महत्वपूर्ण फैसलों पर उनका अंतिम अधिकार था। उनके नेतृत्व में ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में अपना राजनीतिक और सैन्य प्रभाव मजबूत किया।
मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव
मौजूदा युद्ध में अब तक अनुमानित 500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अमेरिका के हमलों के जवाब में ईरान लगातार अरब देशों को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन हमले कर रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता का माहौल है। तीन दशकों से ज़्यादा वक्त तक, अयातुल्ला अली खामेनेई ने ईरान के पॉलिटिकल सिस्टम पर मज़बूत पकड़ बनाए रखी और पूरे मिडिल ईस्ट में अपना असर बढ़ाया।











