Jharkhand: झारखंड में JPSC सिविल सेवा परीक्षा की आयु सीमा को लेकर चल रही बहस के बीच विधायक जयराम महतो ने सरकार के प्रस्तावित फैसले पर सवाल उठाया है।
उन्होंने कहा कि यदि आयु गणना के लिए 2022 को आधार वर्ष बनाया जाता है, तो यह पूरी तरह न्यायसंगत नहीं होगा। उनके अनुसार, कोरोना काल और परीक्षा में देरी को देखते हुए 2020 को आधार वर्ष माना जाना चाहिए, तभी सभी अभ्यर्थियों को वास्तविक न्याय मिल सकेगा।
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महतो ने तर्क दिया कि परीक्षा प्रक्रिया में वर्षों की देरी हुई है, जिसका खामियाजा युवाओं को नहीं भुगतना चाहिए। इसलिए सरकार को ऐसा निर्णय लेना चाहिए जिससे अधिकतम संख्या में पात्र अभ्यर्थियों को अवसर मिल सके।
JPSC आयु सीमा विवाद पर यह नया बयान सियासी और छात्र दोनों स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

विशेष संवाददाता | Khabar Mantra
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