Jharkhand: झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने झारखंड राज्य के सभी लोकसभा एवं राज्यसभा सांसदों को एक पत्र लिखकर वर्षों से लंबित सरना धर्म कोड की मांग को सशक्त रूप से उठाने का आग्रह किया है।
इस आशय की जानकारी प्रदेश कांग्रेस मीडिया चेयरमैन सतीश पॉल मुंजनी ने दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष ने सभी सांसदों से अपील की है कि आदिवासी अस्मिता, धार्मिक पहचान एवं सांस्कृतिक अस्तित्व की रक्षा के लिए सरना धर्म कोड को आगामी जनगणना में एक पृथक धर्म कोड के रूप में शामिल कराने हेतु सदन में एकजुटता से आवाज उठाएं।
गौरतलब है कि 11 नवम्बर 2020 को झारखंड विधानसभा ने सर्वसम्मति से विशेष सत्र में सरना धर्म कोड को लेकर प्रस्ताव पारित किया था, जिसके आलोक में झारखंड सरकार ने 03 दिसंबर 2020 को गृह मंत्रालय को पत्र भेजा था।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि झारखंड एक आदिवासी बहुल राज्य है और यहां के आदिवासी सदियों से प्रकृति पूजक परंपरा को मानते आ रहे हैं। सरना धर्म, जिसमें जल, जंगल, जमीन और प्रकृति की आराधना की जाती है, उनकी सांस्कृतिक पहचान का आधार है। यह धर्म पूजा-पद्धति और आस्थाओं के मामले में अन्य धर्मों से भिन्न है।
प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के वैश्विक मुद्दे के संदर्भ में, सरना धर्म जैसे पर्यावरण-समर्पित धार्मिक पद्धति को पहचान देना भारत को विश्व पटल पर एक नई दिशा दे सकता है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि सरना धर्मावलंबी समुदाय वर्षों से जनगणना में पृथक कोड की मांग को लेकर आंदोलनरत है, जिसे अब गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस ने सांसदों से अपील की कि “सड़क से लेकर संसद तक” इस मुद्दे को मजबूती से उठाएं, ताकि आदिवासियों की धार्मिक पहचान और अस्तित्व को संवैधानिक मान्यता मिल सके।












