Jharkhand News: आजसू के संघर्ष से बहाल होगा OBC आरक्षण; संजय मेहता बोले- ‘2027 चुनाव में सरकार को झुकना ही होगा’
Jharkhand News रांची: झारखंड में ओबीसी (OBC) आरक्षण की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता संजय मेहता ने दावा किया है कि पार्टी के निरंतर संघर्ष और कानूनी लड़ाई के कारण ही राज्य में पिछड़ों को उनका संवैधानिक हक मिलना संभव हो पाया है। उन्होंने कहा कि 2027 के पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण सुनिश्चित करना अब सरकार की विधिक बाध्यता है।
आजसू की कानूनी जीत: सुप्रीम कोर्ट से मिला अधिकार
संजय मेहता के अनुसार, हेमंत सरकार ने 2022 के पंचायत चुनाव में ओबीसी के लिए आरक्षित 10,000 पदों को सामान्य कर दिया था। इस “ओबीसी विरोधी” निर्णय के खिलाफ आजसू सुप्रीमो सुदेश कुमार महतो के निर्देश पर सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका (संख्या 239/2022) दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया था कि भविष्य में झारखंड में होने वाले किसी भी निकाय या पंचायत चुनाव में ‘ट्रिपल टेस्ट’ (Triple Test) के आधार पर ओबीसी आरक्षण देना अनिवार्य होगा। इसी आदेश के आलोक में हालिया नगर निकाय चुनावों में ओबीसी को आरक्षण प्राप्त हुआ।
हेमंत सरकार पर ‘साजिश’ का आरोप
संजय मेहता ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बिना ट्रिपल टेस्ट के ही चुनाव कराना चाहती थी ताकि ओबीसी आरक्षण को समाप्त किया जा सके।
- देरी की रणनीति: ओबीसी आयोग के अध्यक्ष का पद लंबे समय तक खाली रखा गया।
- दबाव की राजनीति: जब सांसद चन्द्रप्रकाश चौधरी ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर ‘कोर्ट की अवमानना’ (Contempt of Court) की चेतावनी दी, तब जाकर सरकार ने ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी की।
Jharkhand News: 2027 पंचायत चुनाव, डेटा संग्रह की मांग
आजसू महासचिव ने कहा कि आगामी 2027 के पंचायत चुनावों के लिए अभी से तैयारी जरूरी है। झारखंड के 4345 पंचायतों, 264 प्रखंडों और 24 जिलों में ओबीसी आरक्षण लागू होना है। सरकार और आयोग को अभी से ओबीसी-1 और ओबीसी-2 का डेटा जुटाना शुरू कर देना चाहिए। आधिकारिक आरक्षण रोस्टर जल्द से जल्द जारी किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की विसंगति न रहे।
“सड़क से सदन और अदालत तक संघर्ष”
संजय मेहता ने जोर देकर कहा कि आज जो भी ओबीसी उम्मीदवार मेयर, अध्यक्ष या पार्षद बने हैं, वह आजसू की कानूनी लड़ाई का परिणाम है। उन्होंने स्पष्ट किया:
“अगर आजसू न्यायालय नहीं जाती, तो नगर निकाय चुनाव में पिछड़ों का हक छिन गया होता। हम पंचायत चुनाव में भी ओबीसी को उनका पूरा अधिकार दिलाकर रहेंगे।”
झारखंड की राजनीति में ओबीसी वोट बैंक एक निर्णायक भूमिका निभाता है। आजसू द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाना और कोर्ट के माध्यम से जीत हासिल करना, आने वाले चुनावों में पार्टी के लिए एक मजबूत आधार तैयार कर सकता है।












