गौरतलब है कि सरना धर्म कोड की मांग झारखंड में जनजातिय समाज द्वारा पिछले लम्बे समय से लगातार की जाती रही है. वर्ष 2020 में झारखंड विधानसभा से सभी दलों की सर्वसम्मति से इसे पारित करके केंद्र को सौपा जा चुका है. हालांकि यह मुद्दा 2024 के झारखंड विधान सभा के चुनाव में भी उछला था.
बहरहाल, इस मांग को लेकर बड़ी संख्या मे आदिवासी समाज के लोग धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो चुके हैं. जानकारी के अनुसार 7 फरवरी को रांची के पिस्का मोड़ में राष्ट्रीय आदिवासी समाज सरना धर्म रक्षा सभा की बैठक हुई. जिसमें बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय सरना संघर्ष समिति के अध्यक्ष शिवा कच्छप ने कहा कि, सरना धर्म कोड की मांग के लिय अब आंदोलन को और भी तेज किया जाएगा.
रांची, लोहरदगा और गुमला से करीब एक हजार से अधिक लोग दिल्ली के लिए रवाना
धर्म कोड की मांग को लेकर दिल्ली कूच करने वालो में रांची, लोहरदगा और गुमला से करीब एक हजार से अधिक लोग दिल्ली के लिए रवाना हुए। जिसका नेतृत्व शिवा कच्छप और नारायण उरांव कर रहें है. सभी लोग हटिया और रांची रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ कर दिल्ली पहुंच चुके है. साथ ही रामगढ़ से करीब 200 लोग और जामताड़ा जिले से मांझी परगना बाइसों के जिला प्रभारी जगदीश मुर्मू के नेतृत्व में लोगों का हूजूम दिल्ली पहुंचा.
अब देखना होगा कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर यह प्रदर्शन कितना सरकार के रुख और झारखंड में इस मुद्दे पर राजनीति में क्या बदलाव आता है. हालांकि आदिवासियों की यह मांग लम्बे समय से लंबित है.












