Ranchi: झारखंड सरकार राज्य की पारंपरिक पहचान को नई दिशा देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि अब झारखंड सिर्फ खनिज संपदा (Mines) के लिए नहीं, बल्कि अपनी बौद्धिक क्षमता, रिसर्च और तकनीकी नवाचार (Minds) के लिए भी जाना जाएगा। नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन सत्र में उन्होंने राज्य के दीर्घकालिक विकास का विजन साझा करते हुए उद्योग जगत, निवेशकों और तकनीकी विशेषज्ञों से साझेदारी का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), पर्यटन और औद्योगिक विकास को गति देने के उद्देश्य से जिंदल ग्रुप, टाटा समूह, गूगल, वरुण बेवरेजेस, ईज माय ट्रिप समेत कई राष्ट्रीय और वैश्विक संस्थाओं के साथ कुल 14 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये केवल कागजी समझौते नहीं, बल्कि झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव हैं।
हेमंत सोरेन ने कहा कि सरकार अल्पकालिक योजनाओं के बजाय दीर्घकालिक साझेदारी पर काम कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी परियोजनाओं को तय समय-सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए, ताकि निवेश का लाभ सीधे राज्य और यहां के लोगों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने जियाडा (JIADA) की औद्योगिक नीतियों में आदिवासियों को मिलने वाली 25 प्रतिशत रियायत को बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की संभावनाओं पर विचार करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि राज्य के मूल निवासी विकास की मुख्यधारा में सबसे आगे होने चाहिए।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वर्षों तक बेहतर संवाद की कमी के कारण झारखंड की वास्तविक संभावनाएं दुनिया के सामने नहीं आ सकीं। अब सरकार निवेशकों और उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद बनाए रखते हुए झारखंड को रिसर्च, इनोवेशन और आधुनिक तकनीक का मजबूत केंद्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए झारखंड के विकास में सहभागी बनने का आह्वान किया।

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