रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में विपक्ष ने राज्य सरकार को कई अहम मुद्दों पर घेरा। विधायक जयराम महतो ने राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सरकार पर जोरदार हमला बोलते हुए इसे “सिर्फ गुणगान” बताया और कहा कि जमीनी हकीकत अभिभाषण में दिखाई नहीं देती।
छात्रवृत्ति भुगतान और योजनाओं पर सवाल
जयराम महतो ने कहा कि राज्य में हजारों छात्रों की छात्रवृत्ति लंबित पड़ी है। कई विभागों में योजनाओं का पैसा अटका हुआ है, जिससे आम जनता और छात्र-युवा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार लंबित भुगतान को प्राथमिकता के आधार पर जारी करे।
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JPSC में वैकेंसी और परीक्षा तिथि विवाद
विधायक ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) में लंबे समय से नई वैकेंसी नहीं निकलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इससे प्रतियोगी छात्रों में निराशा बढ़ रही है।
वहीं विधायक प्रदीप यादव ने JPSC परीक्षा के विज्ञापन 2026 में कटऑफ वर्ष 2026 निर्धारित किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका कहना था कि इस प्रावधान के कारण कई योग्य छात्र परीक्षा से बाहर हो रहे हैं। मामला हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है और सरकार ने भी न्यायालय की बात रखने की सहमति दी है।
संसदीय कार्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि JPSC से जुड़े मुद्दे को सरकार ने संज्ञान में लिया है और इसे प्रमुखता से उठाया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि छात्रों को निराश नहीं किया जाएगा।
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने का आरोप
जयराम महतो ने आरोप लगाया कि राज्य में आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से काम कर रहे कर्मचारियों को महीनों से वेतन नहीं मिला है। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि सरकार को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए।
विकास की रफ्तार और ‘दबोश यात्रा’ पर टिप्पणी
विधायक ने राज्य में अपेक्षित विकास गति नहीं मिलने की बात भी कही। साथ ही उन्होंने ‘दबोश यात्रा’ को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की निजी यात्रा बताते हुए इस पर भी सवाल खड़े किए।
इसके अलावा केंद्र के साथ सरकार गठन और समन्वय को लेकर भी विपक्ष की ओर से सवाल उठाए गए।
सरकार का जवाब
सरकार की ओर से कहा गया कि कई लंबित योजनाओं और वित्तीय मामलों की समीक्षा की जा रही है। छात्रवृत्ति, JPSC और अन्य प्रशासनिक मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।
विधानसभा सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही में छात्र, युवा और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से छाए रहे, जिस पर आगामी दिनों में भी बहस तेज होने के संकेत हैं।











