रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन सदन में तीखी बहस देखने को मिली। सरकार की ओर से विपक्ष और केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा गया। विधायक हेमलाल मुर्मू के बाद विधायक प्रदीप यादव ने भी सदन में आक्रामक रुख अपनाते हुए भाजपा और केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
पेशा नियमावली पर केंद्र को घेरा
प्रदीप यादव ने पेशा नियमावली को लेकर राज्य सरकार की पहल का स्वागत किया, लेकिन केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछले 25 वर्षों में केंद्र ने कभी गंभीरता से इस दिशा में पहल नहीं की। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज किया गया।
भाजपा पर ‘नफरत की राजनीति’ का आरोप
सदन में बोलते हुए उन्होंने भाजपा पर समाज में नफरत फैलाने का आरोप लगाया। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के एक बयान का जिक्र करते हुए प्रदीप यादव ने कहा कि इस तरह के बयान संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी मुख्यमंत्री को इस प्रकार की भाषा का प्रयोग करना चाहिए।
‘वंदे मातरम्’ और आजादी की विरासत पर बयान
प्रदीप यादव ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ स्वतंत्रता संग्राम का नारा रहा है, लेकिन चुनावी राजनीति में इसका इस्तेमाल करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग आजादी की विरासत पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रवाद की आड़ में राजनीति कर रहे हैं।
केंद्र पर तीखा तंज
सदन में उन्होंने केंद्र सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन का पत्राचार मिलता था, जबकि आज की राजनीति का स्तर गिरता जा रहा है। उनका आरोप था कि मौजूदा राजनीति का मकसद समाज में विभाजन पैदा करना है।
सत्र के दूसरे दिन हुई इस बहस ने स्पष्ट कर दिया कि आने वाले दिनों में सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है।












