Dhanbad: धनबाद जिले के प्रधानखंता रेलवे स्टेशन पर शनिवार को कुड़मी समाज ने अपनी लंबे समय से लंबित माँगों को लेकर रेल रोको आंदोलन शुरू कर दिया। बृहद झारखंड आदिवासी कुड़मी मंच के बैनर तले सैकड़ों लोग रेलवे ट्रैक पर उतर आए और कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने तथा कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की माँग कर रहे हैं।
रेलवे ट्रैक पर बैठकर आंदोलन
आंदोलनकारियों ने हावड़ा–दिल्ली मुख्य रेल मार्ग को जाम कर दिया, जिससे कई ट्रेनों का परिचालन बाधित हो गया। मादर और ढोल की थाप के बीच आंदोलनकारी केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए रेल पटरी पर डटे रहे। रेल यातायात बाधित होने के बाद जिला पुलिस और रेल पुलिस ने आंदोलनकारियों को ट्रैक से हटाने का प्रयास शुरू किया।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और सुरक्षा को लेकर अलर्ट मोड पर है।
आंदोलनकारियों की बातें
आंदोलन कर रहे लोगों का कहना है कि वे पिछले 75 सालों से अपनी माँग सरकार के सामने रख रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे शांति पूर्ण तरीके से अपनी माँग रख रहे हैं, और यदि जरूरत पड़ी तो लाठीचार्ज व जेल जाने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
आंदोलनकारियों के बयान
- हीरालाल महतो (आंदोलनकारी, रेड टी-शर्ट, येलो गमछा): “हमारी जाति 75 साल से एसटी दर्जा की माँग कर रही है, लेकिन सरकार सुन नहीं रही। जब तक माँग पूरी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा।”
- गीता देवी (आंदोलनकारी, रेल चेक साड़ी): “हम अपनी पहचान और हक के लिए लड़ रहे हैं। सरकार को अब फैसला करना ही होगा।”
- प्रियंका देवी (आंदोलनकारी, रेड फ्लावर प्रिंट): “हम शांति से आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन अगर दमन हुआ तो भी पीछे नहीं हटेंगे।”
मुख्य माँगें
- कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची में शामिल किया जाए।
- कुड़माली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज किया जाए।












