Ranchi:हूल दिवस के अवसर पर झारखंड के भोगनाडीह में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिस द्वारा लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर झारखंड के नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस घटना को “अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण” बताया है।
मरांडी ने ट्वीट करते हुए कहा,
“आज की यह बर्बरता अंग्रेज़ी हुकूमत के दौर की यादें ताज़ा कर दी है। हूल क्रांति की भूमि पर, छह पीढ़ियों के बाद एक बार फिर सिद्धो-कान्हू के वंशजों को अत्याचार और अन्याय के विरुद्ध सड़क पर उतरना पड़ा है।”
उन्होंने दावा किया कि इस दमनकारी कार्रवाई में कई ग्रामीण घायल हुए हैं, और उन्होंने साहिबगंज एसपी से पूरी जानकारी ली है।
राज्य सरकार पर गंभीर आरोप
मरांडी ने झारखंड सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि
“घुसपैठियों की गोद में बैठी यह सरकार नहीं चाहती कि आदिवासी समाज अपनी अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुट हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की यह “साजिश” कभी सफल नहीं होगी और जैसे सिद्धो-कान्हू, चांद-भैरव और फूलो-झानो ने अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिलाई थी, उसी तरह यह लाठीचार्ज हेमंत सरकार के पतन का कारण बनेगा।
पृष्ठभूमि – क्या है हूल दिवस?
हूल क्रांति (1855) भारत की आज़ादी की पहली जनक्रांतियों में से एक मानी जाती है, जिसे सिद्धो-कान्हू और उनके साथी आदिवासी योद्धाओं ने अंग्रेजों के खिलाफ प्रारंभ किया था। भोगनाडीह (साहिबगंज) इस ऐतिहासिक आंदोलन की जन्मस्थली है।
झारखंड में हूल दिवस पर हुए पुलिस लाठीचार्ज ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। बाबूलाल मरांडी के बयान से साफ है कि आने वाले समय में यह घटना राज्य की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकती है।












