Lunar eclipse : 7 सितंबर की रात देशभर में चंद्रमा का अद्भुत नज़ारा दिखेगा, जब पूर्ण खग्रास चंद्रग्रहण से चंद्रमा लालिमा लिए दिखेगा। बिहार और झारखंड के ज्यादातर ज़िलों में यह खून सा लाल चंद्रमा साफ नज़र आएगा। खगोलविदों के मुताबिक यह भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा को लगेगा और इसका अधिकतम चरण देर रात रहेगा।
21 सितंबर को आश्विन कृष्ण अमावस्या पर आंशिक सूर्यग्रहण भी लगेगा, हालांकि सूर्यग्रहण बिहार-झारखंड से प्रत्यक्ष नहीं दिखेगा।
लोगों में ग्रहण को लेकर कई मान्यताएं रही हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह सामान्य खगोलीय घटना है। फिर भी परंपरागत रूप से कुछ सावधानियां रखी जाती हैं
खग्रास चंद्रग्रहण – 7 सितंबर
- शुरुआत: रात 09:57 बजे
- समापन: रात 01:27 बजे
- सूतक काल: दोपहर से प्रभावी
बिहार समेत भारत के ज्यादातर हिस्सों में यह पूरा ग्रहण साफ़ दिखेगा। चाँद धीरे-धीरे लालिमा लिए अंधेरे में डूब जाएगा, जिसे परंपराओं में बड़ा परिवर्तनकारी समय कहा जाता है।
खंड सूर्यग्रहण – 21 सितंबर
- शुरुआत: रात 11:00 बजे
- समापन: तड़के 03:24 बजे
- दृश्यता: भारत में प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देगा, पर प्रभाव को लेकर चर्चाएँ तेज़ रहेंगी।
ग्रहण के समय सावधानियां
- सूतक काल और ग्रहण के दौरान भोजन पकाना व खाना टालें।
- मूर्तियों को न छुएं, नए कार्य आरंभ न करें।
- गर्भवती महिलाएं धारदार वस्तुओं का प्रयोग न करें।
- ग्रहण को नग्न आंखों से सीधे न देखें।
- इस समय मंत्र-जाप, ध्यान और स्नान-दान को शुभ माना जाता है।
क्यों कहा जा रहा है विशेष:
एक ही महीने में, और वह भी रविवार को, चंद्र व सूर्य दोनों ग्रहण पड़ना बेहद दुर्लभ संयोग है। पुराने ज्योतिषीय मत इसे चेतावनी भरा समय मानते हैं, जब लोगों को संयम, सतर्कता और सकारात्मक कर्म पर ध्यान देना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी पारंपरिक मान्यताओं और ज्योतिष पर आधारित है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक प्राकृतिक खगोलीय घटना है। किसी भी प्रकार का डर या अंधविश्वास फैलाने का उद्देश्य नहीं है।












